कछपुरा मालगोदाम की धूल से 50 हजार लोगों की सेहत पर खतरा
जबलपुर। शहर के कछपुरा मालगोदाम से होने वाले धूल उत्सर्जन के कारण क्षेत्रीय रहवासियों का स्वास्थ्य संकट में है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने इस गंभीर स्थिति को लेकर चिंता जताई है। मालगोदाम की गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले धूल के गुबारों ने लगभग 50 हजार स्थानीय निवासियों का जीना दूभर कर दिया है। स्थिति यह है कि दिन के साथ-साथ शाम के वक्त भी भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही से समूचा क्षेत्र धूल की चपेट में रहता है। एक वर्ष पूर्व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है।
एनजीटी के निर्देशों की अनदेखी
इस प्रदूषणकारी समस्या के समाधान के लिए डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। याचिका में कछपुरा मालगोदाम को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। हालांकि, एनजीटी ने स्थानांतरण को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए रेलवे और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़े निर्देश दिए थे। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया था कि रेलवे साइडिंग के लिए निर्धारित पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। 7 अप्रैल 2025 को जारी हुए इन आदेशों को एक वर्ष का समय बीत चुका है, किंतु संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्यवाही नहीं किए जाने से पर्यावरण की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
गढ़ा साइडिंग में शिफ्टिंग प्रक्रिया के बीच आर्थिक हितों का टकराव
जनसंगठनों का आरोप है कि आर्थिक लाभ के चलते इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकाला जा रहा है। पूर्व में यह निर्णय लिया गया था कि खाद्यान्न के अतिरिक्त सीमेंट और आयरन ओर जैसी सामग्रियों की लोडिंग-अनलोडिंग गढ़ा साइडिंग से की जाएगी। इस निर्णय के बावजूद वर्तमान में भी यह कार्य कछपुरा से ही संचालित किया जा रहा है। निवासियों का मानना है कि कमाई के फेर में जनहित की अनदेखी की जा रही है। प्रदूषण की इसी निरंतरता को देखते हुए अब नागरिक मंच ने पुनः एनजीटी की शरण में जाने का निर्णय लिया है ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जवाबदेही तय की जा सके।
जनहित की लड़ाई में एकजुट हुए नागरिक संगठन
समस्या की गंभीरता को लेकर आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर डॉ. पी.जी. नाजपांडे, रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया और टी.के. रायघटक ने प्रदूषण नियंत्रण की विफलता पर चर्चा की। बैठक में डी.के. सिंह, सुभाष चंद्रा, मनीष शर्मा, संतोष श्रीवास्तव, सुशीला कनीजिया, गीता पांडे, पी.एस. राजपूत और डी.आर. लखेरा भी शामिल हुए। सभी सदस्यों ने एकमत होकर मांग की कि क्षेत्रीय जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने स्पष्ट किया है कि जब तक धूल की समस्या का स्थाई हल नहीं निकलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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