कुशाग्रहणी अमावस्या 2026 कब है? जानें कुशा उखाड़ने की सही तिथि और धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठानों, श्राद्ध कर्म, पूजा-पाठ आदि में पवित्रता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. हिंदू धर्म में प्रकृति के तत्वों को दिव्यता का सर्वोच्च माध्यम माना जाता है. तुलसी के समान ही कुशा को भी देवत्व, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. किसी भी मांगलिक कार्य, पितृ तर्पण, कर्मकांड, यज्ञ-अनुष्ठान आदि में कुशा का उपयोग नकारात्मक शक्तियों के शमन के लिए बेहद जरूरी होता है.
साल भर होने वाले संकल्पों, सात्विक कर्मों के साथ पवित्र कुशा प्राप्त करने का एक विशेष दिन होता है, जो भाद्रपद मास में आता है. भाद्रपद मास में होने वाली कुशाग्रहणी अमावस्या के शुभ समय में कुशा को संरक्षित किया जाता है, जिससे धार्मिक कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हो जाते हैं.
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को कुशा प्राप्त करने का विधान
इसकी ज्यादा जानकारी देते हुए हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि कुशा का उपयोग साल भर होने वाले सभी शुभ कार्यों में किया जाता है, लेकिन शास्त्रों में इसे प्राप्त करने का एक विशेष समय निर्धारित किया गया है. ज्योतिषी के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर पवित्र कुशा को विधिवत मंत्रोच्चार के साथ उखाड़ने का विधान होता है. मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर प्राप्त की गई कुशा से साल भर में होने वाले पूजा-पाठ, श्राद्ध कर्म, धार्मिक अनुष्ठान, हवन-यज्ञ और आध्यात्मिक कार्यों में प्रयोग करने से पवित्रता बनी रहती है, जिससे उनको करने का संपूर्ण फल प्राप्त होता है.
10 सितंबर को मनाई जाएगी कुशाग्रहणी अमावस्या
ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री बताते हैं कि साल 2026 में पवित्र कुशा को उखाड़ने यानी प्राप्त करने वाली कुशाग्रहणी अमावस्या का पर्व 10 सितंबर गुरुवार को होगा. पवित्र कुशा का प्रयोग श्राद्ध पक्षों में पितरों की तृप्ति करने, हवन-यज्ञ में पवित्रता बनाए रखने और पूजा करते समय कुश के आसन पर बैठकर करने से सभी दोष दूर हो जाते हैं.
ग्रहण के समय भी किया जाता है कुशा का इस्तेमाल
वह बताते हैं कि सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समय खाद्य पदार्थों, दूध आदि की शुद्धता बनाए रखने के लिए उसमें पवित्र कुशा रखी जाती है. वह आगे बताते हैं कि साल भर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ही कुशा उखाड़ने यानी कुशा को प्राप्त करने का विशेष समय होता है.
दूसरे दिनों में कुशा उखाड़ने से जुड़ी मान्यता
ज्योतिषी के अनुसार यदि साल भर के अन्य दिनों में कुशा को उखाड़ा जाता है तो उससे दोष लगता है, जिसका निवारण नहीं होता है.

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