क्या डुमना एयरपोर्ट को बंद कर दिया जाए? हाईकोर्ट ने विमानन कंपनियों को लगाई फटकार
जबलपुर: डुमना एयरपोर्ट से बड़े शहरों के लिए फ्लाइट की संख्या बढ़ाने के संबंध में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विमानन कंपनियों को फटकार लगाई है. कोर्ट ने पूछा क्या डुमना एयरपोर्ट को बंद कर दिया जाए? चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने विमानन कंपनियों को डिटेल्ड रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए हैं. इसके अलावा युगलपीठ ने सरकार को तीन बिंदुओं पर जवाब पेश करने को कहा है. याचिका पर अगली सुनवाई 28 अगस्त को निर्धारित की गइ है.
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से 2024 में दायर की गई है जनहित याचिका
नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से 2024 में जनहित याचिका दायर कर जबलपुर से एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने की मांग की गई है. नोटिस जारी होने के बाद विमानन कंपनियों ने अपने जवाब में कहा था कि अधिक टैक्स लिए जाने के कारण वे फ्लाइट संचालन में असमर्थ हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने दलील दी कि जबलपुर में अन्य शहरों की तुलना में कम फ्लाइट हैं. हाल ही में भोपाल के लिए फ्लाइट भी बंद कर दी गई है.
पूर्व में जबलपुर से मुम्बई, पुणे, कोलकाता, बेंगलुरु आदि शहरों के लिए फ्लाइट संचालित होती थी. जबलपुर की एयर कनेक्टिविटी प्रदेश के इंदौर, ग्वालियर तथा भोपाल के सामान थी. फ्लाइट के लगातार बंद होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पूर्व में जबलपुर से औसतन 15 फ्लाइट संचालित होती थीं, वर्तमान में इनकी संख्या कम हो गई है.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एयरलाइंस कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर ठोस निर्णय लेने कहा था
मामले में पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एयरलाइंस कंपनियों के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक कर ठोस निर्णय लेने कहा था. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि बैठक के लिए पत्र लिखा गया था, लेकिन कंपनी के अधिकारी नहीं पहुंचे. यह भी बताया गया कि सरकार ने एयरपोर्ट में कुछ सर्विस चार्ज कम भी कर दिये हैं. जिसके बाद न्यायालय ने पुनः बैठक करने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिये हैं.
वहीं राज्य शासन की ओर से पूर्व में कोर्ट को अवगत कराया गया था कि सरकार ने फरवरी 2025 में एक योजना बनाई है. इसमें एयरलाइंस कंपनियों को रियायती दरों पर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है. सोमवार को सुनवाई के दौरान सरकार की पहल के बावजूद विमानन कंपनियों की उदासीनता पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कोर्ट ने ये तल्ख टिप्पणी की.

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