जबलपुर मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान योजना में बड़ा वित्तीय घोटाला
वर्ष 2021-22 के दस्तावेजों की जांच में उजागर हुई करोड़ों की बंदरबांट,साक्ष्य मिटाने और घोटाले को दबाने में जुटा मेडिकल कॉलेज प्रशासन
जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान भारत योजना के धन आवंटन में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का मामला प्रकाश में आया है। सरकारी खजाने के दुरुपयोग से जुड़े इस प्रकरण में अपात्र व्यक्तियों के बैंक खातों में लाखों रुपये की राशि स्थानांतरित की गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार यह पूरी गड़बड़ी वर्ष 2021-22 के दौरान की गई थी। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों ने योजना के तहत कोई कार्य नहीं किया, उनके खातों में भी भुगतान किया गया।
वित्तीय हेरफेर का खुलासा
आयुष्मान योजना की राशि के ऑडिट और दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि हुई है। जांच में पाया गया कि मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक और अधिष्ठाता कार्यालय में कार्यरत क्लर्कों के निजी खातों में लाखों रुपये भेजे गए। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुनियोजित तरीके से अपनाई गई थी ताकि सरकारी धन को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सके। शुरुआत में इस पूरे मामले को गुप्त रखा गया था, लेकिन हाल ही में एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की गई फाइलों की समीक्षा ने इस भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं।
जिम्मेदार पदों पर बैठे चेहरों की भूमिका
इस घोटाले के दायरे में संस्थान के प्रशासनिक और लेखा विभाग के कर्मचारी सीधे तौर पर शामिल पाए गए हैं। विशेष रूप से तत्कालीन अकाउंट अधिकारी प्रशांत गोटिया के खातों में योजना का पैसा ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई है। इस संबंध में प्रशांत गोटिया का कहना है कि उन्होंने स्वयं राशि की मांग नहीं की थी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिए जाने पर उसे स्वीकार कर लिया था। यह बयान संस्थान के भीतर उच्च स्तर पर सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
मामले को दबाने के प्रयास
अनियमितताएं सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में खलबली मच गई है। सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि दोषी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और मामले को रफा-दफा करने की कोशिशों में जुटे हैं। जांच की दिशा को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाने की खबरें भी आ रही हैं। इससे निष्पक्ष जांच की प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग रहे हैं, क्योंकि कई रसूखदार नाम इस प्रकरण से जुड़े हुए हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग हुई तेज
गरीबों को निःशुल्क उपचार प्रदान करने वाली योजना में भ्रष्टाचार होने से जनता में रोष है। अब इस पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है। भविष्य में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी तंत्र की आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि जांच में दोष सिद्ध होते हैं, तो इसमें शामिल सभी अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की संभावना है। फिलहाल शासन स्तर पर इस रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है ताकि अंतिम निर्णय लिया जा सके।

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