ममता के भाषण के बाद बिगड़े हालात, भवानीपुर में झड़प
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान (29 अप्रैल) से ठीक पहले, कोलकाता की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट 'भवानीपुर' में सियासी पारा उफान पर है। शनिवार को भवानीपुर में उस समय हालात बेकाबू हो गए, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी की रैलियाँ महज 100 मीटर की दूरी पर आमने-सामने हो गईं।
रैलियों के बीच हंगामा: ममता का 'मौन' और कार्यकर्ताओं का आक्रोश
विवाद की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी जनसभा को संबोधित कर रही थीं। आरोप है कि पास में ही चल रही भाजपा की रैली में लाउडस्पीकर की आवाज बहुत तेज थी, जिससे मुख्यमंत्री का भाषण बाधित हो रहा था। बार-बार व्यवधान से नाराज ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों से माफी मांगी और बीच भाषण में ही मंच छोड़ दिया।
मंच छोड़ते ही टीएमसी समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वे तुरंत भाजपा की रैली की ओर बढ़ गए। देखते ही देखते इलाके में नारेबाजी का शोर गूंजने लगा—एक तरफ 'जय बांग्ला' तो दूसरी तरफ 'जय श्री राम' के नारे लग रहे थे। माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि हिंसा की आशंका बढ़ने लगी।
पुलिस का दखल और 'ह्यूमन चेन'
स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने तुरंत मोर्चा संभाला। सुरक्षाबलों ने बीच सड़क पर 'मानव श्रृंखला' (Human Chain) बनाकर दोनों पक्षों के समर्थकों को अलग-अलग किया। हालांकि स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है, लेकिन पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ भवानीपुर में शटडाउन जैसी स्थिति बनी हुई है।
'जंगलराज' बनाम 'जनता का फैसला'
घटना के बाद सुवेंदु अधिकारी ने मोर्चा खोलते हुए टीएमसी पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने इसे 'जंगलराज' का उदाहरण बताते हुए कहा:
"यह टीएमसी की हताशा का नतीजा है। हम इस गुंडागर्दी का जवाब दे रहे हैं। इस बार बंगाल में बदलाव तय है और यह मुकाबला एकतरफा नहीं होगा।"
क्यों इतनी अहम है भवानीपुर सीट?
भवानीपुर केवल एक विधानसभा सीट नहीं है, बल्कि ममता बनर्जी का राजनीतिक किला है। 2011 से ही वे यहाँ से प्रतिनिधित्व करती आई हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने इस बार इस सीट को अपनी जीत का 'सबसे बड़ा लक्ष्य' बना लिया है।
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विविधतापूर्ण आबादी: यहाँ बंगाली, गुजराती, मारवाड़ी और सिख समुदाय का मिश्रण है, जो इसे चुनावी गणित के लिहाज से बेहद जटिल और महत्वपूर्ण बनाता है।
मतदान की तैयारी और सुरक्षा
चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के मद्देनजर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। पूरे इलाके में ड्रोन से निगरानी की जा रही है और केंद्रीय सुरक्षा बलों को मुस्तैद किया गया है। राज्य में पहले चरण में 90% से अधिक मतदान ने पहले ही चुनावी उत्साह को चरम पर पहुँचा दिया है। अब सभी की निगाहें भवानीपुर के इस 'फाइनल राउंड' पर टिकी हैं, जो राज्य की सत्ता की दिशा तय कर सकता है।

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