प्रिंस हत्याकांड: चार पुलिसकर्मी फर्जीवाड़े में फंसे
गुरुग्राम। गुरुग्राम के चर्चित प्रिंस हत्याकांड में हरियाणा पुलिस के चार पुलिसकर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आरोप है कि इन्होंने स्कूल बस कंडक्टर अशोक कुमार को फंसाने के लिए फर्जी सबूत गढ़े और थर्ड डिग्री टॉर्चर कर उससे जबरन जुर्म कबूल करवाया।
सीबीआई की जांच में यह साजिश उजागर हुई। एजेंसी ने जनवरी 2021 में चारों पुलिसकर्मियों—नरेंद्र सिंह खटाना (41), बिरेम सिंह (60), शमशेर सिंह (64) और सुभाष चंद (62)—के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की थी।
कोर्ट की सख्ती
पंचकूला स्थित सीबीआई के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार यादव ने मामले में गंभीरता मानते हुए केस को विशेष न्यायाधीश की अदालत में भेज दिया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी अधिकारी गंभीर अपराधों के दोषी नज़र आते हैं। अब यह केस 1 अक्तूबर को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश होगा।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाई
शुरुआत में हरियाणा सरकार ने इन पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से इंकार कर दिया था। लेकिन सीबीआई ने इस फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। 24 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को मनमाना करार देते हुए मामले की समीक्षा करने के आदेश दिए। फिलहाल चारों आरोपी जमानत पर हैं।
पृष्ठभूमि
यह मामला 8 सितंबर 2017 का है, जब गुरुग्राम के एक नामी स्कूल के वॉशरूम में सात वर्षीय छात्र प्रिंस की हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पुलिस ने जल्दबाजी में बस कंडक्टर अशोक कुमार को गिरफ्तार कर केस निपटाने की कोशिश की। लेकिन मामला तूल पकड़ते ही राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। मृतक छात्र के पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई।

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