जबलपुर में चक्रवाती असर की संभावना, मौसम को लेकर चेतावनी
जबलपुर: मध्य प्रदेश में झंझावाती मौसम का अलर्ट, चक्रवात और द्रोणी के प्रभाव से 28 जिलों में तेज आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी
जबलपुर सहित संपूर्ण मध्य प्रदेश में मौसम के मिजाज में एक बार फिर तीखा बदलाव आया है, जिससे भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत तो मिली है, लेकिन साथ ही प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ गया है। वर्तमान में सक्रिय एक प्रेरित चक्रवात और मध्य प्रदेश से लेकर बिहार तक फैली मौसमी द्रोणी के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक मौसम पलट गया है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि शाम के समय हवाओं की रफ्तार में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी और तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा सकती है। हाल ही में बरगी डैम में हुई क्रूज दुर्घटना को देखते हुए प्रशासन ने इस बार अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है ताकि जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
वायुमंडलीय परिसंचरण और नमी के कारण बदला मौसमी तंत्र
मौसम विभाग के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान में दक्षिण मध्य प्रदेश के ऊपर समुद्र तल से करीब डेढ़ किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्रवातीय घेरा बना हुआ है। इसके साथ ही एक अन्य द्रोणी मध्य प्रदेश से शुरू होकर विदर्भ और कर्नाटक के रास्ते मन्नार की खाड़ी तक फैली हुई है। इस जटिल मौसमी प्रणाली की वजह से बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाएं भारी मात्रा में प्रदेश के भीतर आ रही हैं, जिससे पूर्वी और पश्चिमी अंचलों में बादलों की आवाजाही और अस्थिरता बनी हुई है। पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में हो रही ओलावृष्टि और वर्षा का सीधा असर मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है, जिससे वातावरण में ठंडक घुली है लेकिन आकाशीय बिजली का खतरा बना हुआ है।
अनेक जिलों में 50 किलोमीटर की रफ्तार से चलेंगी धूलभरी हवाएं
मौसम केंद्र ने प्रदेश के 28 महत्वपूर्ण जिलों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है, जहाँ हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है। ग्वालियर, रीवा, जबलपुर, सागर और मऊगंज जैसे प्रमुख जिलों सहित सतना, अनूपपुर, छिंदवाड़ा और मंडला में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की प्रबल संभावना जताई गई है। मैहर, पांढ़ुर्णा, पन्ना और छतरपुर जैसे इलाकों में भी प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने का परामर्श दिया है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे शाम के समय खुले स्थानों, पेड़ों के नीचे या बिजली के खंभों के पास न रुकें और सुरक्षित पक्के निर्माणों के भीतर ही शरण लें।
प्रशासनिक अलर्ट और संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी
मौसम के इस अप्रत्याशित व्यवहार को देखते हुए राज्य और जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। पिछले दिनों हुई अप्रिय घटनाओं से सीख लेते हुए जल निकायों और पर्यटन स्थलों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन टीमों को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा गया है ताकि बिजली गिरने या पेड़ों के गिरने जैसी घटनाओं पर तुरंत राहत पहुँचाई जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की हिदायत दी गई है, क्योंकि तेज हवाओं के साथ होने वाली यह बारिश कृषि उपज को नुकसान पहुँचा सकती है। आगामी कुछ दिनों तक मौसम का यह अस्थिर दौर जारी रहने की संभावना है, जिसके चलते निरंतर निगरानी रखी जा रही है।

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