शराब घोटाला केस: अरविंद केजरीवाल को अदालत से क्यों मिली राहत?
नई दिल्ली|दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले से जुड़े दो केसों में राहत मिल गई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर जारी कई समन को दरकिनार किए जाने की वजह से अरविंद केजरीवाल के खिलाफ केस दर्ज किए गए थे। अदालत ने यह कहते हुए इन्हें खारिज कर दिया कि ईमेल से समन जारी करना वैध नहीं है या सीआरपीसी या पीएमएलए के तहत वैध नहीं है।अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी यह साबित करने में असफल रही कि अरविंद केजरीवाल ने जानबूझकर समन को दरकिनार किया। राउज एवेन्यू कोर्ट में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने कहा कि तब केजरीवाल मुख्यमंत्री थे और उन्हें भी आवागमन का मौलिक अधिकार प्राप्त था। अदालत ने माना कि ‘समन की विधिवत तामील को लेकर कानूनी चुनौती स्वीकार्य है।’
ईमेल से समन पर अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा, ‘ईडी द्वारा न तो ईमेल के माध्यम से समन की तामील साबित की गई है... और न ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) की धारा 50(2) के तहत किसी व्यक्ति को ईमेल के माध्यम से समन जारी करने की प्रक्रिया कानून के अनुसार साबित हुई है।’ जज ने कहा, ‘मान लीजिए कि इन समन को साबित मान भी लिया जाए, तो भी पूरी प्रक्रिया कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है। पीएमएलए या दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत इस प्रकार की तामील का कोई प्रावधान नहीं है...।’
ईडी ने कहा- जानबूझकर शामिल नहीं हुए केजरीवाल
ईडी ने आरोप लगाया कि उसने समन जारी किए थे, जो विधिवत तामील भी किए गए थे, फिर भी तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया और जांच में शामिल नहीं हुए। ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि केजरीवाल ने बेबुनियाद आपत्तियां उठाईं और जानबूझकर जांच में शामिल नहीं होने के बहाने बनाए।
कोर्ट ने कहा- यह साबित नहीं कर पाई एजेंसी
अदालत ने कहा कि ईडी यह साबित करने में भी विफल रही कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का उल्लंघन किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘अभियोजन पक्ष अपने मामले को साबित करने में विफल रहा है, और आरोपी इस मामले में अपने ऊपर लगे आरोपों से बरी होने के हकदार हैं। आरोपी अरविंद केजरीवाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 174 (लोक सेवक के आदेश का पालन न करना) के तहत दंडनीय अपराध से बरी किया जाता है।

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