संस्कारधानी से विकास परियोजनाएं छीने जाने पर नाराजगी
जबलपुर: मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के अस्तित्व पर फिर मंडराया संकट; शक्तियों के बंटवारे को लेकर शहर में आक्रोश
जबलपुर। 'संस्कारधानी' की पहचान और प्रदेश के एकमात्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के अधिकारों को सीमित करने की सुगबुगाहट एक बार फिर तेज हो गई है। प्रशासनिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, इस प्रतिष्ठित संस्थान की शक्तियों को अन्य शहरों में बांटने की गुप्त तैयारी की जा रही है। जबलपुर के बुद्धिजीवियों और नागरिकों ने इसे शहर के शैक्षणिक हक पर सीधा प्रहार बताया है।
विभाजन की नई साजिश: 'विस्तार' के नाम पर शक्तियों का हस्तांतरण
सूत्रों का दावा है कि इस बार यूनिवर्सिटी के विखंडन की योजना को 'प्रशासनिक विस्तार' का नाम देकर पेश किया जा रहा है।
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क्षेत्रीय केंद्रों का प्रस्ताव: भोपाल और उज्जैन में नए क्षेत्रीय कैंपस स्थापित करने का खाका तैयार किया गया है।
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अधिकारों में कटौती: यदि ये केंद्र क्रियाशील होते हैं, तो कॉलेजों की मान्यता, संबद्धता, वार्षिक निरीक्षण और परीक्षाओं के संचालन जैसे प्रमुख अधिकार जबलपुर मुख्यालय के हाथ से निकल जाएंगे।
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दबदबे पर असर: वर्तमान में प्रदेश के सभी मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग और आयुष कॉलेजों का नियंत्रण यहीं से होता है, लेकिन नए प्रस्ताव से इस विश्वविद्यालय की भूमिका महज एक औपचारिक केंद्र की रह जाएगी।
पहले भी हुई थी कोशिश, विरोध के बाद थमी थी फाइल
यह पहली बार नहीं है जब यूनिवर्सिटी की शक्तियों को बांटने का प्रयास हुआ है।
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राकेश सिंह का हस्तक्षेप: कुछ समय पहले जब ऐसी ही फाइलें आगे बढ़ी थीं, तब लोक निर्माण मंत्री और जबलपुर पश्चिम के विधायक राकेश सिंह ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उनके हस्तक्षेप के बाद इस प्रक्रिया को रोक दिया गया था।
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सिंडिकेट फिर सक्रिय: अब एक बार फिर विभागीय स्तर पर सिंडिकेट के सक्रिय होने की खबरें हैं, जिससे शहर के जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच भारी असंतोष है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकास को लगेगा झटका
यूनिवर्सिटी की शक्तियों के विकेंद्रीकरण का असर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जबलपुर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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व्यापारिक नुकसान: प्रदेशभर से हजारों छात्र और कॉलेजों के प्रतिनिधि कार्यवश जबलपुर आते हैं, जिससे यहाँ के होटल, परिवहन और अन्य छोटे व्यवसायों को गति मिलती है।
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संसाधनों का पलायन: यदि स्टाफ, रिकॉर्ड और महत्वपूर्ण संसाधन अन्य शहरों में शिफ्ट कर दिए गए, तो जबलपुर का शैक्षणिक 'सेंट्रल हब' होने का गौरव समाप्त हो जाएगा।
बुद्धिजीवियों की चेतावनी: "जड़ों पर प्रहार बर्दाश्त नहीं"
शहर के नागरिकों और शिक्षाविदों का स्पष्ट कहना है कि सरकार को यदि स्वास्थ्य शिक्षा का विकास करना है तो वह स्वतंत्र नए संस्थान बनाए, लेकिन स्थापित यूनिवर्सिटी की जड़ें काटना उचित नहीं है। जबलपुर के लोग अपनी इस अस्मिता की रक्षा के लिए एक बार फिर लामबंद होने की तैयारी कर रहे हैं।

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