फोन पर उलझे कर्मचारी, मदद नहीं मिली—तड़पते रहे मरीज
कानपुर: एंबुलेंस की देरी और पारिवारिक कलह ने उजाड़ा घर, माँ और दो बेटियों की मौत
कानपुर (उत्तर प्रदेश): स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और लचर एंबुलेंस सेवा ने कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र में एक बार फिर तीन जिंदगियां लील लीं। नजफगढ़ गांव में जहरीला पदार्थ खाने से अचेत हुई चांदनी और उसकी दो मासूम बेटियों, पायल और ब्यूटी, को समय पर अस्पताल पहुँचाने के लिए परिजनों ने बार-बार 108 सेवा को कॉल किया, लेकिन मदद नहीं पहुँची।
समय पर इलाज न मिलने से टूटी सांसें
परिजनों का आरोप है कि निजी वाहन का इंतजाम कर उन्हें सीएचसी सरसौल और फिर वहां से हैलट अस्पताल (कानपुर) पहुँचाने में करीब ढाई घंटे बर्बाद हो गए।
-
हैलट के डॉक्टरों का बयान: डॉक्टरों ने बताया कि अगर तीनों को एक घंटा पहले भी अस्पताल लाया जाता, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी।
-
पूर्व की लापरवाही: इससे पहले 23 अप्रैल को भी इसी क्षेत्र में एक मजदूर को 45 मिनट तक एंबुलेंस नहीं मिली थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
बदहाल सिस्टम: जब डॉक्टरों की मिन्नत भी काम न आई
चांदनी के भाइयों ने बताया कि सुबह 7:30 बजे से ही वे एंबुलेंस के लिए गुहार लगाते रहे। गाड़ी न आने पर वे खुद की कार से सीएचसी पहुँचे। वहाँ डॉक्टर ने गंभीर हालत देख हैलट रेफर कर दिया। आरोप है कि अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस के चालक को डॉक्टर ने फोन किया, लेकिन वह भी नहीं पहुँचा। अंततः निजी वाहन से सुबह 9:45 बजे वे हैलट पहुँचे, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने महाराजपुर थाना प्रभारी को इस लापरवाही की जांच के निर्देश दिए हैं। सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि एंबुलेंस का कंट्रोल रूम लखनऊ में है, देरी के कारणों की रिपोर्ट मांगी जा रही है।
घरेलू तनाव और अलगाव की दुखद दास्तां
चांदनी पिछले काफी समय से अपने पति राकेश से अलग मायके में रह रही थी।
-
शराब और मारपीट: परिजनों के अनुसार पति शराब का लती था। एक बार नशे में उसने छोटी बेटी को छत से फेंकने की कोशिश की थी, जिसके बाद चांदनी ने रिश्ता तोड़ लिया था।
-
मासूमों का साथ: घटना वाले दिन दोनों बेटियों ने यह कहकर स्कूल जाने से मना कर दिया कि वे घर के काम में अपनी माँ की मदद करेंगी। किसी को अंदाजा नहीं था कि वे ऐसा कदम उठाने वाली हैं।
मासूम कब तक चुकाएंगे कलह की कीमत?
यह घटना कानपुर में बढ़ते घरेलू तनाव और उसके बच्चों पर पड़ने वाले घातक असर की एक कड़ी है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं:
-
जनवरी 2026 (घाटमपुर): खाना न बनने पर पिता ने पत्नी और बेटे की हत्या की।
-
19 अप्रैल (किदवईनगर): शशिरंजन तिवारी ने अपनी जुड़वां बेटियों की हत्या की।
-
दिसंबर 2021 (इंदिरानगर): डॉ. सुशील ने पत्नी और तीन बच्चों को खत्म कर दिया था।
खाकी का मानवीय चेहरा
आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण जब परिजन शवों को पोस्टमॉर्टम भेजने के लिए वाहन का प्रबंध नहीं कर सके, तो सुनहला चौकी इंचार्ज प्रवीण कुमार ने अपनी निजी कार से बच्चों के शवों को भिजवाया।

पूरे मैच में गेंदबाजों पर हावी रही बाबर की बल्लेबाजी
Sohum Shah की फिल्म Tumbbad 2 3 दिसंबर 2027 को होगी रिलीज
संजय दत्त की ‘आखरी सवाल’ की मेकिंग वीडियो रिलीज, देशभक्ति की झलक
गंगा एक्सप्रेसवे से सफर होगा आसान, 11 घंटे की दूरी अब 6 घंटे में
गडकरी बोले—भूमि अधिग्रहण की छोटी समस्याएं बनती हैं बड़े आर्थिक नुकसान की वजह
‘मार दिया तो मार दिया’—बिहारी युवक की मौत पर मांझी का विवादित बयान