नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया, जहां छात्रों के पीजी के तौर पर संचालित हो रही 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत भरभराकर ढह गई। मलबे में दबने से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल एम्स ट्रॉमा सेंटर में उपचाराधीन हैं। मलबे में 30 से 40 छात्रों के फंसे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

बेसमेंट में चल रहा था काम, दोपहर में हुआ हादसा

दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के अनुसार, यह घटना रविवार दोपहर करीब 1:33 बजे हुई। अवकाश का दिन होने के कारण ज्यादातर छात्र अपने-अपने कमरों में मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के वक्त इमारत के बेसमेंट में मजदूर खुदाई का कार्य कर रहे थे, तभी पूरा ढांचा अचानक जमींदोज हो गया। सूचना मिलते ही दमकल की आठ गाड़ियां, एनडीआरएफ की दो टीमों के 70 जवान और डॉग स्क्वाड मौके पर पहुंचे और मलबे से लोगों को निकालने का काम शुरू किया।

मलबे के भीतर से गुहार: वीडियो बनाकर भेजा, हाथ में मिली किताब

हादसे के बाद मलबे के नीचे दबे छात्रों ने फोन और वीडियो के जरिए मदद की गुहार लगाई। अंदर फंसे एक छात्र ने 10 सेकंड का वीडियो बनाकर पीजी ग्रुप में भेजा, जिसमें वह मलबे के बीच दबा नजर आ रहा था। बचाव कर्मियों ने जब एक छात्र को बाहर निकाला, तो उसके हाथ में पढ़ाई की किताब थमी हुई थी। अपनों की तलाश में अस्पताल और घटना स्थल पर पहुंचे परिजनों और छात्रों में भारी चीख-पुकार और अफरातफरी देखने को मिली।

नगर निगम का आदेश: चार मंजिल से ऊपर के अवैध निर्माण होंगे सील

घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने सख्त रुख अपनाया है। मेयर प्रवेश वाही ने निर्देश दिए हैं कि चार मंजिल से अधिक के सभी अवैध निर्माणों को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए। इसके साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

आसपास के पीजी खाली कराए, छात्रों के ठहरने की वैकल्पिक व्यवस्था

हादसे के मद्देनजर प्रशासन ने एहतियातन आसपास के कई पीजी भवनों को खाली करा दिया है। अचानक बेघर हुए छात्रों की मदद के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने नजदीकी कॉलेज में ठहरने की व्यवस्था की, जबकि छात्र संगठनों ने प्रभावित युवाओं के लिए भोजन और लंगर का प्रबंध किया।

शीर्ष नेतृत्व ने जताया शोक, सुरक्षा नियमों पर उठे सवाल

हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दौरा बीच में छोड़कर दिल्ली पहुंचकर स्थिति की समीक्षा की। इस त्रासद घटना ने एक बार फिर राजधानी में संचालित पीजी, हॉस्टलों की संरचनात्मक मजबूती, फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास से जुड़े सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी को उजागर कर दिया है।