करूर हादसे में नया मोड़: गवाहों पर दबाव का दावा, कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
नई दिल्ली: तमिलनाडु के करूर में हुई दर्दनाक भगदड़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार यानी 7 जुलाई को एक बेहद महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है। इस याचिका में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि मामले से जुड़े कुछ रसूखदार आरोपी, जो मौजूदा राज्य सरकार में मंत्री पद पर हैं, गवाहों को डराने-धमकाने और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने शीर्ष अदालत के सामने यह मामला उठाते हुए कहा कि हालांकि इस केस की जांच पहले से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में गवाहों पर दबाव बनाया जा रहा है। इस दलील को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को अगले दिन की सुनवाई के लिए लिस्ट करने की मंजूरी दे दी।
मंत्रियों पर गवाहों को प्रभावित करने का संगीन आरोप
सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन (आंशिक कार्यदिवस) बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू शामिल थे, ने वरिष्ठ अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद मामले को मंगलवार की सुनवाई के लिए तय किया। याचिकाकर्ता ने अदालत से तुरंत दखल देने की गुहार लगाई है, क्योंकि सत्ता में बैठे मंत्रियों द्वारा गवाहों को प्रभावित करने से मामले की निष्पक्षता खतरे में पड़ सकती है। अदालत अब इस बात की समीक्षा करेगी कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और गवाहों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
क्यों सीबीआई को सौंपी गई थी इस हादसे की जांच?
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 13 अक्टूबर 2025 को इस दिल दहला देने वाले मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। इस भीषण हादसे में 41 लोगों की अकाल मौत हो गई थी, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। अदालत का मानना था कि मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल रसूखदार लोगों को देखते हुए किसी स्वतंत्र और केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना ही न्याय के हित में होगा ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पूर्व न्यायाधीश की अगुवाई में निगरानी समिति गठित
जांच में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय निगरानी समिति का भी गठन किया था। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार द्वारा पहले से बनाई गई विशेष जांच टीम (एसआईटी) और एक सदस्यीय जांच आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कड़े निर्देश दिए थे कि वह सीबीआई जांच में पूरा सहयोग करे। यह पूरा आदेश मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'टीवीके' द्वारा दायर की गई उस याचिका पर आया था, जिसमें निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।
मंगलवार को होने वाली अदालती कार्यवाही पर टिकी नजरें
7 जुलाई को होने वाली यह सुनवाई करूर भगदड़ मामले के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट इस दौरान तय करेगा कि क्या मंत्रियों के हस्तक्षेप की वजह से जांच पर कोई असर पड़ रहा है। यदि अदालत को इन आरोपों में प्रथम दृष्टया गंभीरता नजर आती है, तो वह जांच एजेंसी और राज्य प्रशासन को गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कड़े व नए दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।

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