दिल्ली यूनिवर्सिटी के 72 घंटे पहले परमिशन वाले नियम पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा जवाब
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) परिसर के भीतर छात्रों और शिक्षकों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित होने पर लगाई गई पाबंदियों का मामला अब अदालत पहुंच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने डीयू प्रशासन के उस हालिया आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय से इस संबंध में जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डीयू से पूछा है कि परिसर के भीतर इस तरह के कड़े नियम लागू करने के पीछे क्या कारण हैं।
मौलिक अधिकारों के हनन का आरोप और 72 घंटे का नियम
अदालत में दायर की गई इस याचिका में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा फरवरी और मार्च के महीनों में जारी किए गए दिशा-निर्देशों को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि डीयू प्रशासन का यह आदेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत देश के नागरिकों को मिलने वाले मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन करता है। इन नए नियमों के मुताबिक, अब विश्वविद्यालय परिसर के भीतर किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन, सभा या सांस्कृतिक गतिविधि का आयोजन करने से कम से कम 72 घंटे पहले डीयू के उच्च अधिकारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन से लिखित में अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
बाहरी अतिथियों और वक्ताओं के शामिल होने पर पूर्ण प्रतिबंध
प्रशासन द्वारा जारी किए गए विवादित आदेश में केवल पहले से अनुमति लेने की बात ही शामिल नहीं है, बल्कि इसमें एक और कड़ा प्रावधान जोड़ा गया है। नए नियमों के तहत परिसर में होने वाले किसी भी कार्यक्रम या चर्चा में बाहरी व्यक्तियों, वक्ताओं अथवा सामाजिक कार्यकर्ताओं को बुलाने या उन्हें शामिल करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। याचिका में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि इस तरह के प्रतिबंधों से विश्वविद्यालय के भीतर स्वतंत्र वैचारिक विमर्श और शैक्षणिक स्वतंत्रता का माहौल पूरी तरह प्रभावित होगा।
छात्र संगठन और याचिकाकर्ता का पक्ष
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र उदय भदौरिया द्वारा दायर की गई इस याचिका में कहा गया है कि छात्र, शिक्षक और गैर-शिक्षण स्टाफ हमेशा से परिसर के भीतर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहे हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की पूर्व अनुमति को अनिवार्य बनाना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने जैसा है। हाई कोर्ट अब इस मामले में डीयू प्रशासन का पक्ष जानने के बाद ही कोई अंतिम फैसला सुनाएगा, जिससे यह साफ होगा कि कैंपस के भीतर प्रदर्शनों और आयोजनों का भविष्य क्या होगा।

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