शहादत-ए-इमाम हुसैन की याद में निकले ताजिए, शहर में दिखी आस्था की मिसाल
जबलपुर: संस्कारधानी जबलपुर में मुहर्रम की नौवीं तारीख के पवित्र अवसर पर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में गहरी अकीदत, श्रद्धा और रूहानी माहौल देखने को मिला। कर्बला के महान शहीदों और इमाम हुसैन की लासाpayload शहादत को याद करते हुए समाज के लोगों ने मस्जिदों और इमामबाड़ों में विशेष नमाज व इबादत की। इस दौरान देश में अमन-चैन, भाईचारे और तरक्की के लिए सामूहिक रूप से विशेष दुआएं मांगी गईं।
इंसानियत की मिसाल: राहगीरों के लिए सबीलें और लंगर का आयोजन
मुहर्रम के इस मौके पर शहर में इंसानियत और खिदमत (सेवा) की कई खूबसूरत तस्वीरें भी सामने आईं। भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए जगह-जगह स्वयंसेवकों द्वारा सबीलें (पियाऊ) स्थापित की गई थीं। इन सबीलों के माध्यम से वहां से गुजरने वाले राहगीरों और जायरीनों को ठंडा पानी, रूहअफजा और विभिन्न प्रकार के शरबत पिलाकर राहत पहुंचाई गई। इसके साथ ही कई प्रमुख चौराहों और इलाकों में 'लंगर-ए-हुसैनी' (भंडारे) के बड़े आयोजन किए गए, जहां हर वर्ग और सभी धर्मों के आम नागरिकों ने आदरपूर्वक शिरकत की, जो शहर की सामाजिक समरसता को और मजबूत करता है।
आकर्षण का केंद्र बने ताजिए, रोशनी से नहाई मशीन वाले बाबा की दरगाह
इस वर्ष भी जबलपुर शहर के अलग-अलग मोहल्लों में बेहद नक्काशीदार, ऊंचे और कलात्मक ताजिए तैयार किए गए हैं। इन खूबसूरत ताजियों की एक झलक पाने और जियारत करने के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। इस विशेष दिन के मद्देनजर ऐतिहासिक ओमती मस्जिद और आस्था के बड़े केंद्र 'मशीन वाले बाबा सरकार दरगाह' को बेहद आकर्षक और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। रात के समय रोशनी से नहाए ये पवित्र धार्मिक स्थल पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहे हैं और लोगों के कौतूहल व श्रद्धा का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। मुहर्रम पर आस्था, सेवा और समर्पण का यह मिला-जुला रूप जबलपुर की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब को पूरी दुनिया के सामने पेश करता है।

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