AIADMK में बगावत की कीमत, 4 विधायकों पर कार्रवाई की तैयारी
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों भारी उलटफेर और कानूनी रस्साकसी का दौर जारी है। सूबे की सत्ता पर काबिज तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार के खिलाफ हाल ही में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पार्टी के आदेश (व्हिप) का उल्लंघन करने वाले एआईएडीएमके (AIADMK) के विधायकों पर अब विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, एआईएडीएमके के चार बागी विधायकों—इसाकी सुबैया, पी. सत्यभामा, एम. मरगथम कुमारवेल और एस. जयकुमार ने पार्टी के निर्देशों के विपरीत जाकर मुख्यमंत्री विजय सी जोसेफ के नेतृत्व वाली सरकार के पक्ष में वोट कर दिया था।
विधायकों द्वारा किए गए इस खुले विद्रोह के बाद तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) जेसीडी प्रभाकर ने सख्त कदम उठाया है। उन्होंने पार्टी व्हिप की अवहेलना करने और दलबदल विरोधी कानून के तहत इन चारों विधायकों के खिलाफ औपचारिक रूप से अयोग्यता की कार्यवाही शुरू कर दी है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके द्वारा दायर की गई आधिकारिक याचिकाओं और शिकायतों के आधार पर ही इन चारों विधायकों के खिलाफ यह कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
विश्वास मत के दौरान व्हिप तोड़कर की थी बगावत
यह पूरा विवाद टीवीके सरकार के खिलाफ विधानसभा में आए अविश्वास प्रस्ताव के समय शुरू हुआ था। उस दौरान एआईएडीएमके के भीतर एक बड़ा असंतोष उभरा और पार्टी के 25 बागी विधायकों के एक बड़े गुट ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार को गिरने से बचाते हुए उनके समर्थन में मतदान किया। जबकि, एआईएडीएमके के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के अनुसार, सभी पार्टी विधायकों के लिए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में (यानी सरकार के खिलाफ) मतदान करना पूरी तरह अनिवार्य था। व्हिप का उल्लंघन होने के बाद से ही तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल आया हुआ है।
कार्रवाई से बचने के लिए इस्तीफे का खेल और सुलह
अयोग्य घोषित होने और भविष्य के चुनाव लड़ने पर रोक लगने जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इन चारों बागी विधायकों ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत विधानसभा अध्यक्ष को अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया। इसके तुरंत बाद ये चारों नेता औपचारिक रूप से सत्तारूढ़ टीवीके पार्टी में शामिल हो गए। दूसरी तरफ, बगावत करने वाले शेष 21 विधायकों की किस्मत का फैसला भी करीब-करीब हो गया है। एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी द्वारा बागी गुट के माफीनामे और सुलह के अनुरोध को स्वीकार किए जाने के बाद, विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने बाकी बचे 21 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद से ही एआईएडीएमके के कई जमीनी पदाधिकारी और कार्यकर्ता लगातार पार्टी छोड़कर सत्तारूढ़ टीवीके का दामन थाम रहे हैं, जिससे मुख्य विपक्षी दल को राज्य में बड़ा संगठनात्मक झटका लगा है।

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