खेतों पर पड़ा असर, डीजल के लिए यूपी बॉर्डर तक पहुंच रहे किसान
भितहा । सीमा से सटे इलाकों में ईंधन की किल्लत दिनों-दिन गंभीर रूप लेती जा रही है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि स्थानीय किसानों को तड़के सुबह से ही अपने वाहनों और कटीलों (गैलन) के साथ उत्तर प्रदेश की सीमा में स्थित ईंधन केंद्रों पर घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। गंडक पार के चारों प्रखंडों के अधिकतर गांव उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे होने के कारण यहाँ के बाशिंदे पूरी तरह पड़ोसी राज्य के पेट्रोल पंपों पर ही आश्रित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, भारी किल्लत के चलते कई ईंधन केंद्र तो हफ्ते-हफ्ते भर बंद पड़े रहते हैं।
कृषि कार्य ठप, सीमित ईंधन मिलने से बढ़ी परेशानी
खेती-किसानी के इस पीक सीजन में ईंधन न मिलने से खेतों की जुताई और बुवाई का काम पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर उमड़ रही भारी भीड़ को देखते हुए पंप संचालकों ने भी राशनिंग शुरू कर दी है, जिसके तहत एक किसान को मुश्किल से 10 से 15 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है। किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए इस समय खेतों को तैयार करना बेहद जरूरी है, लेकिन ईंधन की भारी कमी ने उनके हाथ बांध दिए हैं।
बिजली संकट और फसलों के सूखने का गहराया डर
किसानों की मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हो रहीं; एक तरफ जहाँ डीजल नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी तरफ बिजली की लो-वोल्टेज समस्या ने कोढ़ में खाज का काम किया है। वोल्टेज कम होने के कारण ट्यूबवेल और मोटर नहीं चल पा रहे हैं, जिससे खेतों तक पानी पहुँचाना नामुमकिन हो गया है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से गन्ना और केला उगाया जाता है, जिन्हें बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है। स्थानीय काश्तकारों ने चिंता जताई है कि अगर जल्द ही इस संकट का समाधान नहीं निकाला गया, तो पानी के अभाव में उनकी हरी-भरी फसलें बर्बाद हो जाएंगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

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