यमुना किनारे बसे परिवारों की चिंता बढ़ी, उजड़ने का सता रहा डर
नई दिल्ली। दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में अतिक्रमण हटाओ अभियान की आहट ने सैकड़ों परिवारों की रातों की नींद उड़ा दी है। प्रशासन द्वारा जारी बेदखली के नोटिस के बाद यहां के निवासियों में गहरा आक्रोश और बेबसी देखी जा रही है। वर्षों पुराने आशियानों पर बुलडोजर चलने के डर से अब 310 परिवारों के सामने सिर छिपाने की जगह और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
यमुना किनारे उजड़ने की कगार पर पुश्तैनी आशियाने: 310 परिवारों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे यहाँ सात पीढ़ियों से रह रहे हैं। उनके पूर्वजों ने जिस जगह को अपना घर बनाया, आज उसे खाली करने का फरमान जारी कर दिया गया है। लोगों का दर्द है कि यमुना की लहरों के साथ उनका जीवन और रोजगार दोनों जुड़े हुए हैं।
ब्रिटिश काल से है नाता, अब नोटिस ने चौंकाया
निवासियों का दावा है कि वे यहाँ ब्रिटिश शासन काल से निवास कर रहे हैं। उनके पास जन्म प्रमाण पत्र से लेकर वोटर आईडी कार्ड तक सभी दस्तावेज इसी पते के हैं। उनका कहना है कि इतने दशकों में कभी उन्हें हटने के लिए नहीं कहा गया, लेकिन अब अचानक 15 दिन का समय देकर उन्हें बेघर किया जा रहा है।
सुविधाएं भी हैं और पहचान भी
दिलचस्प बात यह है कि जिस इलाके को अतिक्रमण बताया जा रहा है, वहाँ सालों से बिजली की वैध सप्लाई हो रही है और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं। निवासियों का आरोप है कि सरकार यमुना की गंदगी को साफ करने में विफल रही है, इसलिए अब दोष गरीबों पर मढ़कर उनके घर उजाड़े जा रहे हैं। उनका तर्क है कि यमुना निवासियों की वजह से नहीं, बल्कि शहर के सीवर और फैक्ट्रियों के कचरे से दूषित हुई है।
रोजगार और शिक्षा पर मंडराया खतरा
यमुना बाजार में केवल एक समुदाय नहीं, बल्कि ब्राह्मण, नाई, मल्लाह और माली समाज के लोग भी रहते हैं। इन सबका काम यमुना और वहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा है। बेदखली से न केवल इनका रोजगार छिन जाएगा, बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी बीच में छूट जाएगी।
पंडा एसोसिएशन और निवासियों का पक्ष
स्थानीय लोगों और संगठनों ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया है:
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कानूनी लड़ाई की तैयारी: यमुना घाट पंडा एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे इस नोटिस के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और अपनी जमीन बचाने के लिए हर संभव कानूनी प्रयास करेंगे।
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भावुक अपील: बुजुर्ग निवासियों का कहना है कि उनके पुरखे इसी मिट्टी में समा गए। अब इस उम्र में वे अपना घर छोड़कर कहाँ भटकेंगे?

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