अधिक वजन वाली महिलाओं में बढ़ता है फाइब्रॉइड का खतरा
यूट्रस फायब्रॉइड, जिसे आम भाषा में गर्भाशय की गांठ कहा जाता है, महिलाओं में होने वाली एक आम लेकिन गंभीर समस्या है। यह गर्भाशय की मांसपेशियों में होने वाली असामान्य वृद्धि है। हालांकि, अधिकांश मामलों में ये गांठें गैर-कैंसरकारी (Benign) होती हैं, लेकिन इन्हें लंबे समय तक नजरअंदाज करना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। विशेष रूप से अधिक वजन वाली महिलाओं और 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है।
फायब्रॉइड के मुख्य लक्षण और पहचान
फायब्रॉइड के लक्षण इसके आकार और गर्भाशय में इसकी स्थिति पर निर्भर करते हैं:
-
अत्यधिक रक्तस्राव: माहवारी के दौरान सामान्य से अधिक ब्लीडिंग होना या बड़े थक्के (Clots) निकलना।
-
शारीरिक कमजोरी: खून की कमी (एनीमिया) के कारण लगातार थकान और सुस्ती महसूस होना।
-
यूरिन संबंधी समस्याएं: गांठ का दबाव मूत्राशय पर पड़ने से बार-बार पेशाब आने जैसी दिक्कतें।
-
प्रजनन क्षमता पर प्रभाव: यदि गांठ फैलोपियन ट्यूब के पास है, तो बांझपन (Infertility) या गर्भावस्था में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।
कारण और जटिलताएं
फायब्रॉइड का सबसे प्रमुख कारण हार्मोनल असंतुलन है। शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ने से ये गांठें विकसित होने लगती हैं। इसके अलावा मोटापा, बढ़ती उम्र और गर्भनिरोधक दवाओं का अधिक सेवन भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। यदि स्थिति गंभीर हो जाए, तो यह किडनी में सूजन पैदा कर सकती है और दुर्लभ मामलों में असहनीय दर्द के कारण मरीज की स्थिति चिंताजनक हो सकती है।

राशिफल 24 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बनी आर्थिक संबल
बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, हर मुक्त बच्चे के पुनर्वास पर होगा विशेष फोकस
महिला एशियन चैंपियनशिप की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग नाथुबरखेड़ा अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का किया निरीक्षण
समान नागरिक संहिता को व्यापक जनसमर्थन
माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम बनेगा जनसेवा का नया केंद्र : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
धमतरी जिले में 200 एकड़ से बढ़ाकर 600 एकड़ तक औषधीय खेती के विस्तार का लक्ष्य
मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधियों पर लगातार कार्रवाई
इंदौर और विकास हैं एक दूसरे के पर्याय : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
कृषि में छत्तीसगढ़ का नया अध्याय बनाया धमतरी जिले ने