ऑफिस दस्तावेजों को लेकर कड़ा आदेश, उल्लंघन पर कार्रवाई तय
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के दौरान मची राजनीतिक हलचल के बीच राज्य के प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मतगणना की गहमागहमी के बीच ममता बनर्जी प्रशासन ने सरकारी दस्तावेजों और गोपनीय फाइलों की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने सोमवार को एक विशेष सर्कुलर जारी कर सभी विभागों को फाइलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
फाइलों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि चुनाव परिणामों के इस दौर में सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा सर्वोपरि है।
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कार्यालय से बाहर जाने पर रोक: किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को कार्यालय परिसर से महत्वपूर्ण फाइलें या दस्तावेज बाहर ले जाने की अनुमति नहीं होगी।
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नष्ट करने पर पाबंदी: आदेश में चेतावनी दी गई है कि किसी भी स्थिति में फाइलों को हटाया या नष्ट नहीं किया जा सकेगा।
फोटोकॉपी और स्कैनिंग पर भी लगा पहरा
दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने तकनीकी स्तर पर भी पाबंदियां लगा दी हैं:
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प्रतिबंधित गतिविधियां: अब बिना आधिकारिक अनुमति के किसी भी सरकारी कागज की फोटोकॉपी करना या उसे स्कैन करना प्रतिबंधित रहेगा।
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हिसाब-किताब अनिवार्य: विभाग के प्रत्येक पत्राचार और फाइल की वर्तमान स्थिति का सटीक रिकॉर्ड रखना अब अनिवार्य कर दिया गया है।
अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी
प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही के मानक तय कर दिए हैं।
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विभागाध्यक्षों पर दारोमदार: इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की सीधी जिम्मेदारी विभाग के सचिवों और प्रमुखों को सौंपी गई है।
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कठोर कार्रवाई की चेतावनी: मुख्य सचिव ने साफ किया है कि यदि भविष्य में कोई भी महत्वपूर्ण फाइल गायब पाई जाती है या पत्राचार में गड़बड़ी मिलती है, तो इसके लिए संबंधित उच्च अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा और उन पर कार्रवाई की जाएगी।

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