बहादुरी की मिसाल बनी शिखा जैन, तीन जिंदगियां बचाकर गंवाई अपनी जान
दिल्ली। दिल्ली के सदर बाजार इलाके में बीती रात एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां एक महिला ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से अपने पूरे परिवार को तो बचा लिया, लेकिन खुद को मौत के आगोश से नहीं निकाल सकीं।
आधी रात को मची चीख-पुकार
तड़के करीब पौने चार बजे, जब पूरी इमारत गहरी नींद में सो रही थी, शिखा जैन की आंख अचानक धमाके की आवाज और धुआं देखकर खुली। घर में आग लग चुकी थी। शिखा ने बिना समय गंवाए सबसे पहले घर के सदस्यों और दोनों नौकरानियों को जगाकर बाहर निकलने को कहा। उन्होंने खुद दरवाजा खोलकर सबको सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता दिया और शोर मचाकर पड़ोसियों को भी आगाह करने की कोशिश की।
अपनों को बचाने की जद्दोजहद
आग की लपटें तेजी से फैल रही थीं। शिखा ने अपने पति नवीन के साथ मिलकर सबसे पहले अपने बुजुर्ग पिता अरुण जैन को सीढ़ियों के रास्ते नीचे उतारा। इसके बाद नवीन तुरंत पड़ोसियों से गद्दे मांगकर लाए और उन्हें नीचे बिछा दिया। उन्होंने दूसरी मंजिल पर फंसी अपनी दोनों बेटियों, रक्षता और प्रियल को खिड़की का कांच तोड़कर नीचे कूदने के लिए कहा।
इसी दौरान, शिखा अपनी बीमार मां दर्शना जैन को बचाने के लिए आग के बीच दोबारा अंदर चली गईं। उन्होंने अपनी मां को तो सुरक्षित बाहर निकाल दिया, लेकिन धुएं और लपटों के कारण वह खुद अंदर ही फंस गईं और अचेत होकर गिर गईं।
परिवार की स्थिति और पृष्ठभूमि
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शिखा जैन: परिवार को बचाने के बाद खुद जिंदगी की जंग हार गईं। बाद में उनका झुलसा हुआ शव बरामद हुआ।
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नवीन जैन: पेशे से कारोबारी नवीन का सदर बाजार में गत्ते का व्यापार है। वह गंभीर रूप से झुलस गए हैं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
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बच्चियां: बड़ी बेटी रक्षता नोएडा से बीबीए कर रही है और छोटी बेटी प्रियल 10वीं की छात्रा है। हादसे में दोनों घायल हैं।

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