नीम करौली, नयना देवी...धार्मिक पर्यटन ने कैसे एकदम बदली नैनीताल की तस्वीर
उत्तराखंड का प्रसिद्ध हिल स्टेशन नैनीताल इन दिनों केवल प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते धार्मिक पर्यटन के कारण भी चर्चा में है. नीम करौली बाबा की आस्था से जुड़ा कैंची धाम अब देश-विदेश के श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बन चुका है. इसका सीधा असर यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों पर साफ दिखाई दे रहा है. बीते कुछ सालों में कैंची धाम की लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया है. खासकर जब विराट कोहली ने वर्ष 2022 में यहां दर्शन किए, उसके बाद इस धार्मिक स्थल की चर्चा देशभर में और तेज हो गई. आज स्थिति यह है कि सालभर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है, जिससे नैनीताल का पर्यटन अब केवल सीजन तक सीमित नहीं रहा है.
ऑफ सीजन वाली टेंशन खत्म
उभरते धार्मिक पर्यटन ने स्थानीय लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. पहले जहां रोजगार के सीमित साधन थे, अब युवा गाइड, टैक्सी चालक, होमस्टे संचालक, फूड स्टॉल मालिक और अन्य पर्यटन से जुड़े रोजगारों को अपनाकर अपनी पहचान बना रहे हैं. इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों तक आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हुआ है. स्थानीय पर्यटन से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि मंदिरों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने होटल, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को नई गति दी है. नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट बताते हैं कि जिले में धार्मिक पर्यटन ने ऑफ-सीजन की समस्या को काफी हद तक कम कर दिया है. अब साल के अधिकांश समय होटल बुकिंग बनी रहती है, जिससे आय में स्थिरता आई है.
बिष्ट कहते हैं कि सरकार भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है. कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों को विकसित करने के लिए ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के तहत कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. जिसमें कैंची धाम मंदिर का सौंदर्यीकरण और मां नयना देवी मंदिर कॉरिडोर का काम मुख्य है. बेहतर सड़क, पार्किंग, ट्रैफिक मैनेजमेंट और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं को और मजबूत करने की जरूरत है. यदि समय रहते इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पर्यटन का दबाव शहर की व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है. बिष्ट कहते हैं कि मंदिरों से शहर के पर्यटन को मजबूती मिली है, सरकार को बेहतर कनेक्टिविटी के लिए सड़कों का निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करना होगा
50 करोड़ की परियोजना पर काम
लोक निर्माण विभाग नैनीताल के अधिशासी अभियंता रत्नेश सक्सेना बताते हैं कि कैंची धाम के विकास के लिए लगभग 40 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है, जबकि नयना देवी मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. पहले चरण में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से इन धार्मिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है. इसके बाद दूसरे चरण में घोड़ाखाल मंदिर, गर्जिया देवी मंदिर, हनुमान धाम और हनुमान गढ़ी मंदिर को शामिल करने की योजना है, जिस पर 50 से 60 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है. हालांकि, बढ़ती भीड़ के साथ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. इसके बावजूद, यह कहना गलत नहीं होगा कि नीम करौली बाबा की आस्था ने नैनीताल की तस्वीर बदल दी है.

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