ईरान-अमेरिका युद्धविराम पर गहराया संकट, राष्ट्रपति ट्रंप की तेहरान को अंतिम चेतावनी
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर नाजुक मोड़ पर पहुँच गया है। खाड़ी क्षेत्र में अस्थायी शांति के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बुधवार तक कोई दीर्घकालिक समझौता नहीं होता, तो वर्तमान युद्धविराम को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सोमवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों के इस्लामाबाद में बातचीत की मेज पर बैठने की संभावना है, जिसे शांति बहाली की आखिरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने शुक्रवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से चर्चा के दौरान संकेत दिए कि मध्य पूर्व से कुछ सकारात्मक खबरें मिली हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि समझौता न होने की स्थिति में अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई और बमबारी शुरू कर सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान के साथ सौ फीसदी डील फाइनल नहीं हो जाती। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान में यह महत्वपूर्ण जलमार्ग व्यापार के लिए खुला है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव कम होने के संकेत मिले हैं। लेकिन ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिकी सेना की मौजूदगी और नाकाबंदी में तब तक ढील नहीं दी जाएगी, जब तक औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हो जाते। ट्रंप के इस बयान ने दुनिया के सबसे संवेदनशील एनर्जी कॉरिडोर में फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है।
एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में ट्रंप ने ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को वापस लाने की योजना का भी जिक्र किया। यह डस्ट ईरान में पुराने अमेरिकी हमलों के मलबे से संबंधित है, जिसे वापस लाने के लिए उन्होंने एक संयुक्त खुदाई ऑपरेशन का सुझाव दिया है। राष्ट्रपति ने अपनी कूटनीतिक कोशिशों का बचाव करते हुए दावा किया कि हाल के प्रयासों से इजरायल और लेबनान के बीच ऐसा युद्धविराम संभव हुआ है, जो पिछले 78 सालों में नहीं देखा गया। उन्होंने इस क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पाकिस्तान के नेतृत्व सहित सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे देशों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। अब पूरी दुनिया की नजरें बुधवार की समयसीमा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि खाड़ी क्षेत्र शांति की ओर बढ़ेगा या फिर से युद्ध की आग में झुलसेगा।

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