लोकल चुनाव पर फोकस: कांग्रेस ने नेताओं को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी
शिमला | हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों का बिगुल बजने से पहले ही राजनीतिक पारा चढ़ गया है। राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने इन चुनावों को "सत्ता का सेमीफाइनल" मानते हुए अपनी पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है। शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय 'राजीव भवन' में गुरुवार को हुई राजनीतिक मामलों की कमेटी की बैठक में चुनावी फतह के लिए एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया गया।
कैबिनेट मंत्रियों को मिलेगी 'फील्ड' की कमान
बैठक में लिया गया सबसे बड़ा फैसला यह है कि इस बार चुनाव की जिम्मेदारी केवल संगठन पर नहीं, बल्कि सीधे सरकार के मंत्रियों और विधायकों पर होगी।
पर्यवेक्षक के रूप में तैनाती: प्रत्येक जिले और विधानसभा क्षेत्र में मंत्रियों और विधायकों को बतौर पर्यवेक्षक उतारा जाएगा।
जवाबदेही तय: वे न केवल चुनावी रणनीति बनाएंगे, बल्कि जिला परिषद और नगर निगमों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों की जीत भी सुनिश्चित करेंगे।
सुक्खू और विनय कुमार को मिला 'फ्री हैंड'
चुनावों के लिए समितियों के गठन और प्रभार सौंपने का पूरा अधिकार मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार को दिया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अगले एक सप्ताह के भीतर इन कमेटियों की घोषणा कर दी जाएगी, ताकि समय रहते रणनीति को जमीन पर उतारा जा सके।
संगठनात्मक एकता पर जोर
बैठक की अध्यक्षता कर रहीं पार्टी प्रभारी रजनी पाटिल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन चुनावों में टीम वर्क ही सबसे बड़ा हथियार है। मुख्यमंत्री सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और संगठन महामंत्री विनोद ज़िंटा की मौजूदगी में पार्टी ने संदेश दिया कि नगर निगमों (धर्मशाला, सोलन, मंडी) से लेकर 3,600 से अधिक पंचायतों तक कांग्रेस की मजबूत पकड़ बनाना ही एकमात्र लक्ष्य है।
सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन: जल्द होगा तारीखों का ऐलान
हिमाचल में चुनावी हलचल तेज होने की मुख्य वजह सुप्रीम कोर्ट का वह निर्देश है, जिसमें 31 मई से पहले पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव संपन्न कराने के आदेश दिए गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि राज्य निर्वाचन आयोग अगले 4-5 दिनों के भीतर चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर सकता है।

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