महाराष्ट्र में कथित सेक्स स्कैंडल, प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग
नासिक | नासिक के अशोक खरात उर्फ भोंदू बाबा के सेक्स स्कैंडल ने महाराष्ट्र की सियासत में बवंडर खड़ा कर दिया है. लेकिन इस मामले को राजनीति से इतर देखने की भी जरूरत है. इस स्कैंडल में अब तक करीब 58 महिलाओं के साथ खरात के सेक्स टेप सोशल मीडिया पर आ चुके हैं.इन 58 महिलाओं की जिंदगी में अब सिर्फ अंधेरा ही रहेगा. उनकी जिंदगी नरक से भी बदतर होने वाली है. वीडियो देखकर आसानी से कहा जा सकता है कि इन सभी महिलाओं को हिप्नोटाइज किया गया होगा, क्योंकि सभी बाबा की श्रद्धा में डूबी हुईं हैं. यही नहीं इन महिलाओं के इतर जो भी अन्य महिलाएं इस बाबा के पास गईं ,होंगी सभी को समाज में शक की नजर से देखा जाएगा. सबसे बड़ी बात है कि इन महिलाओं के सगे संबंधी भी समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं बचेंगे. इन महिलाओं के साथ उनके बच्चे और उनके परिवार वाले भी समाज के निशाने पर होंगे. याद करिए दिल्ली के एक मशहूर स्कूल की बच्ची का वीडियो वायरल हुआ था. बच्ची के पिता ने इस घटना के बाद शर्मिंदगी के चलते सुसाइड कर लिया था. सवाल उठता है कि इन सैकड़ों परिवारों की जिंदगी नरक बनाने के लिए जिम्मेदार कौन है. इन 58 पीड़िताओं का शोषण तो खरात ने बंद कमरे में किया था पर देश की जनता इन महिलाओं का चीरहरण हर रोज सोशल मीडिया पर कर रही है.करोड़ों सीसीटीवी, अरबों मोबाइल से खरबों जीबी डाटा बन रहा है पर उस पर किसी का नियंत्रण नहीं है. हम डिजिटल इंडिया का नारा तो लगा रहे हैं पर डेटा प्रोटेक्शन पर हमारा न के बराबर नियंत्रण है. यह तो आम लोगों की बात है वीवीआईपी लोग भी डेटा के इस प्रवाह से परेशान हैं. हमारे पास कोई ऐसी व्यवस्था नहीं है कि हम फेक डाटा, फेक न्यूज आदि पर कड़ाई से नियंत्रण कर सकें. सोशल मीडिया पर आए डेटा को जब तक हम कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं वह यूनिवर्सल बन चुका होता है.हमारी सरकार को सोशल मीडिया को कंट्रोल में लेने के लिए हर कोशिश करनी होगी. देश विरोधी प्रोपेगेंडा तक को हम रोकने में नाकामयाब हैं. यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस तरह के वीडियोज़ से अपराधी का बहुत कम नुकसान होता है. कई बार तो ऐसे तथाकथित बाबा या अपराधी इस बदनामी को भी प्रचार के रूप में इस्तेमाल कर लेते हैं. इसलिए जरूरत है बहुस्तरीय सुधार की.सबसे पहले, कानून को और सख्त तथा त्वरित बनाना होगा, ताकि इस तरह के मामलों में तुरंत कार्रवाई हो सके. दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मॉडरेशन के जरिए ऐसे कंटेंट को शुरुआती स्तर पर ही रोकना जरूरी है. समाज को भी आत्ममंथन करना होगा. जब तक लोग ऐसे विडियोज़ को देखना और साझा करना बंद नहीं करेंगे, तब तक यह समस्या खत्म नहीं होगी. यह मामला केवल एक बाबा के अपराध का नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की संवेदनहीनता, हमारी डिजिटल लापरवाही और हमारी कानूनी कमजोरियों का संयुक्त परिणाम है|

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