MSP पर गेहूं बिक्री में अड़चन: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से परेशान किसान, कमलनाथ ने मोहन यादव को लिखा पत्र
छिन्दवाड़ा : समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सरकार पंजीयन तो कर रही है लेकिन तकनीकी समस्याओं के चलते किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसके चलते किसानों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है. ऑनलाइन आ रही दिक्कतों को खत्म करने और पंजीयन की तिथि बढ़ाने के लिए छिंदवाड़ा विधायक व पूर्व सीएम कमलनाथ ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है.
रजिस्ट्रेशन डेट बढ़ाने के लिए कमलानथ का सीएम को पत्र
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा, '' समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सरकार ने पंजीयन तो शुरू कर दिए हैं लेकिन समस्याओं की कमी नहीं है, जिसके चलते किसानों के समय पर पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं. ऐसे में कई किसान पंजीयन से वंचित रह जाएंगे. इसलिए पंजीयन की डेट बढ़ानी चाहिए.'' मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे अर्द्ध शासकीय पत्र क्रमांक-67 में उल्लेख किया है कि मप्र के किसानों से गेहूं उपार्जन हेतु मप्र शासन ने पंजीयन की अंतिम तिथि 10 मार्च 2026 निर्धारित की है लेकिन प्रदेश के अनेकों जिलों से लगातार यह शिकायतें प्राप्त हो रही है कि पंजीयन के लिए संचालित ऑन लाइन पोर्टल में कभी सर्वर की परेशानी तो कभी अन्य तकनीकी कारणों से सुचारू रूप से संचालित नहीं हो रहा. परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसान भाई अपना पंजीयन नहीं करा पाए हैं, इनमें छिन्दवाड़ा व पांढुर्णा जिले के भी किसान शामिल है जो वर्तमान में पंजीयन से वंचित रह गए हैं.
फिर किसानों को सस्ते दामों में बेचना पड़ेगा गेहूं
कमलनाथ ने लिखा है कि सर्वर डाउन होने की समस्या के चलते प्रदेश के कई जिलों में आधे से अधिक किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है. इसके चलते वे चिंतित और अत्याधिक परेशान हैं. यदि समय पर इस समस्या का समाधान नहीं किया गया और पंजीयन की अंतिम तिथि नहीं बढ़ाई जाती है तो हजारों किसानों को अपनी गेहूं की उपज को समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाएंगे, ऐसे में उन्हें अपनी फसल को मजबूरीवश खुले बाजार में कम दामों पर बेचना पड़ेगा, जिससे वे आर्थिक नुकसान झेलेंगे.
ऑनलाइन खसरा और रकबा नंबर में भी आ रही दिक्कत
समर्थन मूल्य में गेहूं बेचने के लिए किसान जब ऑनलाइन सेंटरों पर पंजीयन करने के लिए पहुंच रहे हैं, तो ऐसे में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. किसान नवीन पटेल ने बताया कि ऑनलाइन गिरदावरी पटवारी के द्वारा की जाती है, जिससे निश्चित होता है कि कितनी जमीन पर किसान ने गेहूं लगाया है. ऑनलाइन रिकार्ड दुरुस्त नहीं किया गया है, जिसकी वजह से पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं जबकि खेतों में गेहूं लगाया गया है. दरअसल पटवारी मौके पर पहुंचकर ऑनलाइन फीडिंग नहीं कर पाए इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है.

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