स्लीपर कोच बसों पर रोक से नाराज़ टूरिस्ट ऑपरेटर, सड़कों पर उतरा विरोध
उज्जैन। आरटीओ द्वारा स्लीपर कोच बसों पर अचानक रोक लगाए जाने से नाराज टूरिस्ट बस ऑपरेटरों ने गुरुवार को विरोध प्रदर्शन किया. विरोध स्वरूप 100 से अधिक बसों को सामाजिक न्याय परिसर में खड़ा कर दिया गया. टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या समय दिए आरटीओ ने स्लीपर कोच बसों को बंद कर दिया, जिससे पूरे व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ा है।
आरटीओ का फैसला कई लोगों को कर रहा प्रभावित
एसोसिएशन के अनुसार यह फैसला केवल बस मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि टूरिस्ट एजेंट, गाइड, ड्राइवर, कंडक्टर, स्टाफ और धार्मिक यात्राओं से जुड़े छोटे कारोबारियों को भी सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है. हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी इस क्षेत्र से जुड़ी है. बसों के संचालन पर रोक के कारण धार्मिक यात्राएं और बारातों का आवागमन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
आरटीओ जांच के बाद पास हुई थी बसें
बस ऑपरेटरों ने बताया कि जिन स्लीपर कोच बसों पर रोक लगाई गई है, वे सभी उज्जैन में ही आरटीओ द्वारा विधिवत जांच के बाद पास की गई थीं. वर्ष 2019 में 2×2 सीट व्यवस्था के साथ इन बसों का फिजिकल चेक कर फिटनेस और रजिस्ट्रेशन किया गया था, जो 28 दिसंबर 2025 तक वैध था. छह वर्षों तक सुचारू रूप से चलने के बाद अब अचानक इन्हें बंद करना न तो व्यावसायिक रूप से उचित है और न ही नैतिक रूप से उचित है।
नए नियम में सभी बसों को 2×1 सीट व्यवस्था के निर्देश
एसोसिएशन के सदस्य भावन कालरा ने बताया कि हाल की कुछ घटनाओं के बाद आरटीओ ने एकाएक नियम बदलते हुए सभी बसों को 2×1 सीट व्यवस्था में बदलने का निर्देश दे दिया. उज्जैन में ऐसी कुल 839 बसों को ब्लॉक कर दिया गया है. यदि आरटीओ के नए नियमों के अनुसार बसों में बदलाव कराया गया, तो प्रति बस करीब 7 से 10 लाख रुपये का खर्च आएगा और इसमें कम से कम एक साल का समय लग सकता है. फिलहाल उज्जैन की 100 बसें पूरी तरह से खड़ी कर दी गई हैं, जबकि प्रदेशभर में ऐसी करीब 8 हजार बसें हैं. टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने सभी संबंधित विभागों से मांग की है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, ताकि रोजगार, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रह सके।

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