माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी के साथ हुए दुर्व्यवहार पर बोले अयोध्या के संत और जगत गुरु, कहा - सरकार को बदनाम...
प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए दुर्व्यवहार पर अयोध्या धाम के साधु-संतों और जगत गुरु ने अपना पक्ष रखा है. साथ ही हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले की एक स्वर में सराहना की है. शंकराचार्य के साथ हुए दुर्व्यवहार पर संत-समाज का कहना है कि ये यूपी सरकार और सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश है. कई संतों ने तो यहां तक कहा है कि शंकराचार्य सरस्वती को ऐसी बातें शोभा नहीं देती हैं. आइए जानते हैं शंकराचार्य सरस्वती के मामले पर किस संत क्या कहा…
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन जैसे उनकी पालकी को रोका गया, वह बहुत गलत था, लेकिन कुछ सरकार को बदनाम करने वाले लोग इस परिस्थिति का फायदा उठा रहे हैं. मैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से निवेदन करूंगा कि कुछ विधर्मियों की तरफ से पहले ही देश, संस्कृति और सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. ये समय संयम से काम लेने का है, लेकिन साथ ही मामले की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई भी हो.
उन्होंने हर की पौड़ी पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के फैसले पर कहा कि यह फैसला बहुत सराहनीय है, क्योंकि मां गंगा हमारी देवी मां हैं और उस स्थल से गैर-हिंदुओं की आस्था नहीं जुड़ी है. सरकार ने यह फैसला देरी से लिया, लेकिन बहुत अच्छा लिया.
आर्य संत वेदांती के वरुण दास महाराज
आर्य संत वेदांती के वरुण दास महाराज ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ मौनी अमावस्या के दिन जो कुछ हुआ, वो बहुत गलत था. ऐसे लोगों की पहचान की जाए कि वे कौन लोग हैं जो साधु समाज को निशाना बना रहे हैं. अखाड़ा स्नान करने जाएगा तो अपनी गरिमा के साथ ही जाएगा, अपनी पालकी के साथ ही जाएगा, लेकिन प्रयागराज की धरती पर साधु के साथ ऐसा अनुचित व्यवहार होना बहुत गलत है. मेरा यूपी सरकार से अनुरोध है कि मामले की गहनता से जांच करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें.
वहीं, हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि मुसलमान हर तरफ जिहाद फैला रहे हैं और ऐसे में मां गंगा की रक्षा करना हर हिंदू का कर्तव्य बनता है. इस फैसले का हम सभी स्वागत करते हैं.”
महामंडलेश्वर विष्णु दास
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि मौनी अमावस्या का दिन स्नान की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण दिन होता है और लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए आए थे. ऐसे में प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका था, बल्कि रथ को जाने से रोका था. अब स्नान के दौरान भीड़ होती है और ऐसे में भगदड़ मच जाए तो जिम्मेदार कौन होगा? इसी कारण उन्हें रोका गया, लेकिन वे तो खुद सीएम योगी पर आरोप लगा रहे हैं कि वे बदला ले रहे हैं. साधु-संतों को ऐसी बातें शोभा नहीं देती हैं.

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