नाबालिग से दरिंदगी का मामला: श्योपुर कोर्ट ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई
श्योपुर : 2 साल पहले नाबालिग के साथ हुए दुष्कर्म मामले में श्योपुर कोर्ट ने आरोपियों को आजीवन कारावास की कठोरतम सजा सुनाई है. इसके साथ ही न्यायालय ने पीड़िता को 10 लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाए जाने का आदेश भी पारित किया है. ये वारदात 16 सितंबर 2024 को श्योपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई थी, जिसे लेकर अब फैसला सुनाया गया है.
घर के अंदर खींचकर किया था दुष्कर्म
16 सितंबर 2024 को दोपहर करीब 3 बजे 15 वर्षीय नाबालिग घर से सामान लेने दुकान के लिए निकली थी. इसी दौरान गली के पास आरोपी नानका उर्फ शोएब पुत्र सरफराज खान (21 वर्ष) मिला, जिसने पीड़िता को सामान लाने के बहाने अपनी गली में बुलाया. जब पीड़िता सामान देने उसके मकान की ओर गई, तो आरोपी ने उसका हाथ पकड़कर जबरन मकान के अंदर खींच लिया. वहां पहले से मौजूद दूसरे आरोपी मोहसिन उर्फ मोसीन पुत्र मकसूद खान (23 वर्ष) ने दरवाजा बंद कर दिया और नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया.
गर्दन पर चाकू अड़ाकर सामूहिक दुष्कर्म, दुकानदार ने बचाया
आरोप थे कि शोएब ने पीड़िता के साथ मारपीट की, जबकि मोहसिन ने उसकी गर्दन पर चाकू रखकर धमकाया. इसके बाद शोएब ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया. इसी दौरान सामान देने वाला दुकानदार वहां पहुंच गया, जिससे मोहसिन का झगड़ा हो गया. शोर सुनकर पीड़िता की मां और भाई भी मौके पर पहुंच गए और पीड़िता को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाकर घर ले आए. पीड़िता ने घर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी परिजनों को दी, जिसके बाद थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई.
पुलिस द्वारा इस मामले में आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 70(2), 127, 351(3), 115(2) व पॉक्सो एक्ट की धारा 5(ग)/6 सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया.
कोर्ट ने अपराध को बेहद गंभीर माना
मामले की सुनवाई तृतीय अपर सत्र न्यायालय, श्योपुर में हुई, जहां तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश/अनन्य विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) बबीता होरा शर्मा ने 15 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता की आयु 18 वर्ष से कम है और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया, जो अत्यंत गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला अपराध है. ऐसे कृत्य समाज में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भय और असुरक्षा की भावना उत्पन्न करते हैं, जिससे न केवल बच्चों बल्कि देश के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
आरोपियों को कई धाराओं में दोषी माना, आजीवन कारावास की सजा
न्यायालय ने आरोपी शोएब उर्फ नानका को धारा 70(2) बीएनएस में आजीवन कारावास व 10 हजार रु अर्थदंड, धारा 127(2) बीएनएस में 6 माह का कठोर कारावास व 5 हजार रु अर्थदंड, धारा 351(3) बीएनएस में 5 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रु अर्थदंड और धारा 115(2) बीएनएस में 6 माह का कठोर कारावास व 5 हजार रु अर्थदंड से दंडित किया. वहीं, आरोपी मोहसिन खान को भी धारा 70(2) बीएनएस में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड, अन्य संबंधित धाराओं के तहत सजा के साथ-साथ धारा 25(1-बी)(बी) आयुध अधिनियम के अंतर्गत भी दंडित किया गया है.
इसके अतिरिक्त न्यायालय ने पीड़िता को 10 लाख रुपये की प्रतिकर राशि दिलाए जाने का आदेश पारित किया, जो जुर्माने की राशि से अलग होगी. प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रतिभा उमरैया व एडीपीओ रिचा शर्मा द्वारा प्रभावी पैरवी की गई.

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