अमेरिका में प्रवासी कल्याण पाने वालों की देश की सूची में शामिल नहीं भारत
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रवासी कल्याण पाने वालों की देश के हिसाब से रैंकिंग के आंकड़ों की सूची सामने आई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस सूची में भारत का नाम नहीं है। सूची में भारत का नाम ना होना कोई सामान्य बात नहीं है। यह अमेरिका के बड़े प्रवासी माहौल में भारतीय प्रवासियों की खास आर्थिक प्रोफाइल को दिखाता है। ये अमेरिका में सरकारी मदद पाने वाले प्रवासी परिवारों का हिस्सा दिखाते हैं।
इस सूची में सबसे ऊपर नाम भूटान का है, और भूटानी प्रवासियों का अमेरिकी सरकार से मदद पाने की दर 81.4 प्रतिशत है। इसके बाद यमन (उत्तर) 75.2 फीसदी, सोमालिया 71.9 फीसदी और मार्शल आइलैंड्स 71.4 फीसदी के साथ हैं। कई दूसरे देशों में भी कल्याणकारी भागीदारी का स्तर ऊंचा है।
इस सूची में डोमिनिकन रिपब्लिक और अफगानिस्तान दोनों ही देशों का दर 68.1 फीसदी है। कांगो 66 फीसदी, गिनी 65.8 फीसदी और इराक 60.7 फीसदी पर हैं। इस समूह में खासतौर से कई सेंट्रल अमेरिकन, कैरिबियन और अफ्रीकी देश शामिल हैं। ग्वाटेमाला 56.5 फीसदी, सूडान 56.3 फीसदी और अल साल्वाडोर 55.4 फीसदी पर दिखाए गए हैं। होंडुरास 52.9 फीसदी पर है। बांग्लादेश 54.8 फीसदी पर लिस्टेड है। इसके अलावा, लिस्ट के दूसरे पेज पर वे देश शामिल हैं, जिसमें वेलफेयर में कम, लेकिन फिर भी उल्लेखनीय, भागीदारी है। आइवरी कोस्ट सूची में 49.1 फीसदी के साथ सबसे आगे है, इसके बाद लाइबेरिया 48.9 फीसदी और अल्जीरिया 48.1 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर हैं। सीरिया 48 फीसदी पर लिस्टेड है। जॉर्डन और लीबिया दोनों 47.8 फीसदी पर हैं। इथियोपिया 47.6 फीसदी, रवांडा 47.1 फीसदी और मोरक्को 46.6 फीसदी पर दिखाए गए हैं। पाकिस्तान 40.2 फीसदी और मिस्र 39.3 फीसदी पर शामिल हैं।
लेकिन भारत का दो पेज की सूची में कहीं भी नाम नहीं है। अमेरिका में प्रवासी और कल्याण के मुख्य राजनीतिक मुद्दे हैं, और भारत इनमें काफी चर्चा में रहता है। इसके बावजूद भी लिस्ट में इसकी गैर-मौजूदगी है। यह पता चला है कि भारतीय प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में, खासकर तकनीक, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग में, एक बड़ी भूमिका निभाते हैं। वे इनकम टैक्स रेवेन्यू में अहम योगदान देते हैं और सिलिकॉन वैली में कई स्टार्टअप्स शुरू करने में शामिल रहे हैं।

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