इस्तांबुल में बड़ा फैसला: 57 मुस्लिम देशों ने मिलकर बनाया B57+ बिजनेस मंच
भारत के दुश्मन माने जाने वाले तुर्की के इंस्ताबुल में इस्लामिक देशों की बड़ी बैठक हुई है. इस्लामिक चैंबर ऑफ कॉमर्स के अधिकारी इस बैठक को लीड कर रहे हैं. बैठक में बिजनेस समिट को लेकर कई फैसले किए गए हैं. इनमें आर्थिक सहयोग और निजी क्षेत्र के एकीकरण का फैसला सबसे अहम है.
मीडिया के मुताबिक इस बैठक में बी57+ मंच बनाने की घोषणा की गई. इस मंच के जरिए इस्लामिक कंट्री अगली पीढ़ी के व्यावसायिक नेताओं को तैयार करेगी. इसे काफी अहम माना जा रहा है.
सवाल- बी57+ मंच क्यों है अहम?
1. पहली बार दुनिया के 57 से ज्यादा मुस्लिम देशों ने एक साथ बिजनेस को लेकर बड़ा प्लान किया है. सऊदी, तुर्की और ईरान जैसे देशों को जहां इसका फायदा होगा, वहीं पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देश भी इस आईडिया का लाभ उठा सकेंगे.
2. इस्लामिक देशों की अर्थव्यवस्था हलाल उत्पादों और रियल स्टेट आधारित है. कुछ इस्लामिक देश तेल के व्यापार भी शामिल है. आने वाले दिनों में छोटे-छोटे मुस्लिम देशों में भी बड़े पैमाने पर इसमें बढ़ोतरी देखी जा सकती है.
3. भारत के पड़ोस में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम कंट्री है, जिसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. बी57+ मंच के बन जाने से इन देशों की तरक्की हो सकती है.
प्लान को कैसे सफल बनाया जाएगा?
इस प्लान को सफल बनाने के लिए इस्लामिक चैंबर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारी अलग-अलग देशों का दौरा करेंगे. ये पदाधिकारी स्थानीय स्तर के बिजनेस लीडर्स से मुलाकात कर नए लोगों को ट्रेंड करेंगे.
इस्लामिक चैंबर ऑफ कॉमर्स की कोशिश मुस्लिम देशों में नए-नए बिजनेस लीडर्स बनाने की है. इस्लामिक चैंबर ऑफ कॉमर्स की पहली बैठक पाकिस्तान में प्रस्तावित है.
इस्लामिक चैंबर ऑफ कॉमर्स क्या है?
1977 में पाकिस्तान के कराची में इसकी स्थापना हुई थी. सऊदी के नेता वर्तमान में इसके चेयरमैन पद पर आसीन हैं. शुरुआत में इस संगठन का लक्ष्य इस्लामिक देशों में बिजनेस और निवेश को बढ़ाना था. अब इसने विकास के लक्ष्य को भी अपने साथ जोड़ा है.

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