1962 भारत-चीन युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका, अब फिर से सक्रिय होगा RSS
दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रांत प्रचारकों (Prant Pracharak) की बैठक चल रही है। तीन दिवसीय बैठक में संघ के कार्यकर्ताओं की भूमिका पर बात हुई। इस बैठक में ऑपरेशन सिंदूर जैसे हालात में संघ के कार्यकर्ता किस तरह अपनी भूमिका निभा सकते हैं। इस पर विचार विमर्श किया गया। संघ ने इस बैठक में निर्णय लिया है कि वह सिविल डिफेंस एक्सरसाइज का आयोजन करेगा। संघ की प्रांत प्रचारकों की बैठक में बांग्लादेश में हिदुओं के साथ हो रहे अत्याचार का मुद्दा भी उठा।
संगठन की प्रगति की समीक्षा
दिल्ली में चल रही संघ की बैठक में संगठन की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। 2 अक्टूबर 2025 को संघ अपना 100वां स्थापना दिवस मनाएगा। शताब्दी वर्ष के समारोह की योजना पर भी बैठक में चर्चा हुई। संघ इस बात पर विचार कर रहा है कि संकट के समय में सरकार व प्रशासन के साथ तालमेल बैठाकर कर कैसे काम किया जाए।
भारत-चीन युद्ध में संभाली थी ट्रैफिक की कमान
संघ सामाजिक सद्भाव बैठकें और आउटरीच अभियान आयोजित करने जा रहा है। संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि RSS के कार्यकर्ता मुश्किल समय में हमेशा आगे रहे हैं। उन्होंने देश की मदद की है। अब एक बार फिर, RSS युद्ध जैसी स्थिति में मदद करने के लिए तैयार है। वे सिविल डिफेंस एक्सरसाइज में भी भाग लेंगे। आंबेकर ने कहा कि 1962 के युद्ध में स्वयंसेवकों ने दिल्ली में ट्रैफिक को संभाला था। उन्होंने नेहरू के अनुरोध पर राहत सामग्री भी पहुंचाई थी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में चल रहे प्रांत प्रचारकों की बैठक में लगभग 233 पदाधिकारी बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 32 सहयोगी संगठनों के प्रमुख भी शामिल हैं।

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