एक ही विभाग पर नियम दो, आपसी तालमेल में कमी से बच्चों का एडमिशन में हो रहा नुकसान
भोपाल: मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल नहीं होने के कई उदाहरण सामने आते हैं, जिससे हितग्राहियों को सरकारी कार्यालयों के बेवजह चक्कर काटने पड़ते हैं. लेकिन अब एक ही विभाग की विभिन्न शाखाओं में तालमेल नहीं होने का मामला सामने आया है.इसका असर स्कूली बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है, लेकिन इसमें सुधार के लिए विभाग तैयार नहीं है. जिससे अभिभावक परेशान हो रहे हैं.
बच्चों की उम्र तय करने में 4 माह का अंतर
बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले माध्यमिक शिक्षा मंडल और राज्य शिक्षा केंद्र के बीच तालमेल की कमी है. इसका खामियाजा छात्र और उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है. दरअसल, स्कूलों में प्रवेश के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल और राज्य शिक्षा केंद्र के अलग-अलग मापदंड है. जिससे दोनों शाखाओं की प्रवेश नीति में बच्चों की उम्र तय करने की तिथियों में 4 महीने का अंतर है. ऐसे में बच्चों को एडमिशन लेने में परेशानी हो रही है.
इसलिए बच्चों के एडमिशन में होती है परेशानी
दरअसल, प्रदेश में पहली से आठवीं तक शैक्षणिक कार्यक्रम जारी करने और नियम बनाने की जिम्मेदारी राज्य शिक्षा केंद्र की है. राज्य शिक्षा केंद्र ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए जारी नई प्रवेश नीति में उम्र की गणना 31 जुलाई 2025 से होती है. वहीं, एमपी बोर्ड के नियमानुसार 9वीं कक्षा में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों की उम्र न्यूनतम 13 वर्ष होनी चाहिए. जबकि 9वीं कक्षा में प्रवेश के लिए उम्र की गणना 1 अप्रैल 2025 से तय करने के निर्देश दिए हैं.
ऐसे समझें उम्र का बंधन, जिससे पेरेंट्स परेशान
राज्य शिक्षा केंद्र के अनुसार कक्षा पहली में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष और अधिकम आयु 7.5 वर्ष निर्धारित की गई है. लेकिन इसके पहले तक बच्चों को 3 से 5 साल के बीच आंगनबाड़ी में प्रवेश दिया जाता था. इसके बाद 5 साल की उम्र में उन्हें पहली कक्षा में प्रवेश मिल जाता था.
दरअसल, राज्य शिक्षा केंद्र उम्र की गणना 31 जुलाई से करता है. ऐसे में 5 साल में पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाला छात्र 8 साल बाद 31 जुलाई को 13 वर्ष की आयु पूरी कर सकेगा. जबकि माध्यमिक शिक्षा मंडल के अनुसार 9वीं में प्रवेश के लिए बच्चों की उम्र 13 वर्ष होनी चाहिए, इसकी गणना 1 अप्रैल से होती है. जिसके कारण कई छात्र इस अवधि में 13 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर पाते और बाद में उनके एडमिशन में परेशानी होती है.
राज्य शिक्षा केंद्र के नियमों के कारण नहीं हुआ दाखिला
भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र में रहने वाले पवन लोधी ने बताया, '' मेरे बेटे की उम्र 31 जुलाई 2025 तक 6 साल 6 महीने हो रही है, जिससे उसका एडमिशन नहीं हो पाया. यदि उम्र की गणना 1 अप्रैल 2025 से की जाती तो वह 6 साल 2 महीने का रहता और उसका आसानी से एडमिशन हो जाता. अब एक साल बर्बाद होगा. वहीं, अवधपुरी निवासी राकेश पाठक ने बताया कि राज्य शिक्षा केंद्र के नियमानुसार उनके बेटी का एडमिशन केजी टू में हो गया है. लेकिन जब बेटी 9वीं कक्षा में पहुंचेगी तो उसके एडमिशन में परेशानी हो सकती है. उसकी उम्र में 3 महीने का अंतर आ सकता है.
एडमिशन में काई खास फर्क नहीं पड़ता : माशिमं
इस मामले में माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव डॉ. संजय गोयल ने कहा, '' राज्य शिक्षा केंद्र और माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जो गाइडलाइन जारी की जाती है, उनमें उम्र तय करने की तारीख में दो से तीन महीने का मार्जिन रहता है. कोई तारीख निर्धारित कर देने से दोनों स्कूलों के एडमिशन में कोई खास फर्क नहीं पड़ता है. हालांकि, कुछ अपवाद हो सकता है. लेकिन सामान्यतः ऐसा नहीं होता है.''

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