हाईकोर्ट सख्त, बेंगलुरु भगदड़ मामले में पुलिस सस्पेंशन पर मांगा जवाब
नई दिल्ली। बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर 4 जून को हुई भगदड़ में 11 लोगों की जान चली थी। अब इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि इस हादसे के लिए पांच पुलिस वालों को सस्पेंड करना कितना जायज था? कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या इन अफसरों को दूसरी जगह ट्रांसफर करना काफी नहीं होता?
हाईकोर्ट के जस्टिस एस.जी. पंडित और टी.एम. नदाफ की बेंच ने सरकार से इस सस्पेंशन के पीछे का ठोस कारण मांगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार को यह साबित करना होगा कि सस्पेंशन का फैसला सही था या नहीं। यह बात तब सामने आई जब कर्नाटक सरकार ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के 1 जुलाई के उस फैसले को चुनौती दी। इस फैसले में IPS अफसर विकास कुमार विकास की सस्पेंशन रद कर दी गई थी।
सभी अफसरों की सस्पेंशन वापस लेने का था आदेश
ट्रिब्यूनल ने विकास की सस्पेंशन को “मैकेनिकल” और बिना ठोस सबूतों वाला करार देते हुए उनकी तुरंत बहाली का आदेश दिया था। इतना ही नहीं, ट्रिब्यूनल ने सुझाव दिया कि बाकी चार सस्पेंड किए गए अफसरों को भी राहत दी जाए, जिनमें उस वक्त के पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद भी शामिल थे। लेकिन सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
एडवोकेट जनरल शशिकिरण शेट्टी ने कोर्ट में कहा कि ट्रिब्यूनल ने जल्दबाजी में फैसला लिया और उन चार अफसरों को राहत देने की सलाह दी, जो इस मामले में पक्षकार भी नहीं थे।
शेट्टी ने दावा किया कि उनके पास सबूत हैं कि ये पांचों अफसर अपने ड्यूटी में लापरवाही के दोषी हैं। उन्होंने कोर्ट से ट्रिब्यूनल के आदेश पर रोक लगाने की अपील की।
शेट्टी ने कोर्ट को बताया कि ट्रिब्यूनल के 1 जुलाई के आदेश के बाद विकास ने 2 जुलाई को बिना किसी औपचारिक आदेश के वर्दी पहनकर ड्यूटी जॉइन कर ली। इस पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक विकास को कोई जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को तय की है।
विकास के वकील, सीनियर एडवोकेट धन्य चिनप्पा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि उनका मुवक्किल अगली सुनवाई तक कोई कदम नहीं उठाएगा। विकास ने ट्रिब्यूनल में दावा किया था कि वो इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने IPL जीत की परेड की जानकारी पुलिस को पहले नहीं दी थी।
RCB की गलती या पुलिस की नाकामी?
ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा था कि RCB ने इंस्टाग्राम पर बिना पुलिस की इजाज़त के परेड और जश्न का ऐलान कर दिया, जिसके बाद भारी भीड़ स्टेडियम पहुंची। ट्रिब्यूनल के मुताबिक, RCB ने न तो पुलिस से अनुमति ली और न ही कोई समन्वय किया। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद 5 जून को विकास समेत पांच पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया गया था।

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