*किसान कल्याण वर्ष के नारों में दब गई किसानों की चीख, ब्याज के बोझ तले टूट रहे परिवार : कन्हैयालाल मिश्रा*
अनूपपुर
रिपोर्टर अंजनी कुमार सिंह
*किसान कल्याण वर्ष के नारों में दब गई किसानों की चीख, ब्याज के बोझ तले टूट रहे परिवार : कन्हैयालाल मिश्रा*
*सरकार मंचों से किसानों का सम्मान कर रही, लेकिन ज़मीन पर किसान परिवार ब्याज और कर्ज में दम तोड़ रहे*

अनूपपुर। सरकारें किसानों के नाम पर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक किसान हितैषी होने के भाषण दे रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मना रही है। करोड़ों रुपये के आयोजन, विज्ञापन और प्रचार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। अनूपपुर सहित प्रदेश के कई किसान परिवार आज भी पुराने कर्ज और बढ़ते ब्याज के बोझ तले कराह रहे हैं।वर्ष 2018 में चुनावी घोषणा के दौरान किसानों के ऋण पर ब्याज माफी का वादा किया गया था। किसानों से फार्म भरवाए गए, आवेदन लिए गए और सरकार ने मंचों से ब्याज माफी के दावे भी किए, लेकिन हकीकत यह है कि हजारों किसानों को इसका लाभ आज तक नहीं मिला।स्थिति इतनी भयावह है कि कई किसान इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनका कर्ज और ब्याज आज भी उनके परिवारों का पीछा नहीं छोड़ रहा। जब दिवंगत किसानों के उत्तराधिकारी ऋण जमा करने बैंक पहुंचते हैं, तो उन्हें मूल राशि से कई गुना अधिक ब्याज बताया जाता है। मजबूर परिवार न कर्ज चुका पा रहे हैं और न ही सरकारी दफ्तरों के चक्कर खत्म हो रहे हैं।भारतीय गण वार्ता पार्टी (भगवा पार्टी) के अनूपपुर जिलाध्यक्ष कन्हैयालाल मिश्रा ने कहा कि सरकार किसान कल्याण के नाम पर सिर्फ प्रचार कर रही है, जबकि असल किसान आज भी व्यवस्था की मार झेल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पूरे प्रदेश में निष्पक्ष जांच कराई जाए तो हजारों ऐसे मामले सामने आएंगे, जहां ब्याज माफी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई।उन्होंने बताया कि भगवा पार्टी द्वारा कई बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश के कृषि मंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर किसानों की समस्या से अवगत कराया गया और ब्याज माफी लागू कराने की मांग की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भगवा पार्टी ने मांग की है कि दिवंगत किसानों के उत्तराधिकारियों सहित सभी पात्र किसानों का बढ़ा हुआ ब्याज तत्काल माफ किया जाए, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और किसानों को मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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