अमृत भारत योजना में भ्रष्टाचार की बू? अनूपपुर रेलवे स्टेशन के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
अमृत भारत योजना में भ्रष्टाचार की बू? अनूपपुर रेलवे स्टेशन के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
सड़क उखड़ रही, टाइल्स टूट रहीं, लाइटें हो रहीं बंद, तिरंगा गायब । आखिर किसकी निगरानी में हो रहा करोड़ों का विकास कार्य?-जीवेन्द्र सिंह
अनूपपुर। भारतीय रेलवे को देश में गुणवत्ता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अनूपपुर रेलवे जंक्शन में अमृत भारत योजना के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्य अब सवालों के घेरे में हैं। करोड़ों रुपये की लागत से किए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर नगर पालिका परिषद अनूपपुर के पूर्व उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जीवेन्द्र सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने रेलवे स्टेशन परिसर में हो रहे निर्माण कार्यों को गुणवत्ता विहीन बताते हुए संबंधित इंजीनियरों और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस सड़क का निर्माण हाल ही में किया गया था, वह बनते ही उखड़ने लगी है। स्टेशन परिसर में लगाई गई नई टाइल्स कई स्थानों पर टूट चुकी हैं, जबकि यात्रियों की सुविधा के लिए स्थापित की गई प्रकाश व्यवस्था की लाइटें दो माह के भीतर ही जवाब देने लगी हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्टेशन परिसर में लाखों रुपये खर्च कर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए विशाल ध्वज स्तंभ तो स्थापित कर दिया गया, लेकिन वहां तिरंगा ध्वज ही नहीं दिखाई दे रहा है। स्थानीय नागरिक इसे राष्ट्रीय सम्मान और सरकारी धन दोनों के प्रति लापरवाही का उदाहरण मान रहे हैं।
नगरवासियों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूर्ण होने के कुछ ही समय बाद अपनी गुणवत्ता खोने लगें, तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही की ओर भी संकेत करता है। सवाल यह उठ रहा है कि निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई और गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे?
अमृत भारत योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना है, लेकिन अनूपपुर में सामने आ रही तस्वीर इस उद्देश्य के विपरीत दिखाई दे रही है। जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि निर्माण कार्य टिकाऊ नहीं हैं, तो इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष एवं स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
जीवेन्द्र जी ने कहा कि विकास कार्यों की वास्तविक सफलता उद्घाटन समारोहों से नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और स्थायित्व से तय होती है। अनूपपुर रेलवे स्टेशन में उठ रहे ये सवाल केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़े हुए हैं। अब निगाहें रेलवे प्रशासन पर हैं कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जनता के विश्वास को कायम रखता है या नहीं।

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