रतलाम जन कल्याणकारी सरकार द्वारा आमजन के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शासकीय अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं एवं चिकित्सा उपकरणों की सुविधाएं निरंतर प्रदान की जा रही है।

 

जिससे की गरीब और जरूरतमंद व्यक्तियों का समय पर उपचार कर उन की जान बचाई जा सके। सिविल सर्जन डॉ एम एस सागर ने बताया कि शासकीय अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं एवं चिकित्सा सुविधाओ से प्रीमेच्योर नवजात की जान बचाई गयी। हुक्की पति देवीसिंह निवासी कांग्सी को प्रसव पीड़ा के साथ रतलाम के एमसीएएच इकाई में भर्ती किया था। महिला की डिलीवरी 3 माह पूर्व ’26’ सप्ताह में 5 फरवरी  को हुई थी । डिलिवरी के बाद बच्चे का अत्यधिक कम वजन और, प्रीमेच्योर एवं सांस लेने में दिक्कत के चलते एनबीसीसी नर्स द्वारा एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। बच्चे का वजन मात्र 700 ग्राम था । बच्चे  को एसएनसीय रतलाम में भर्ती किया गया भर्ती के समय बच्चे की स्थिति अत्यधिक गंभीर बनी हुई थी, क्योंकि नवजात के फेफड़े पूरी तरह परिपक्व नहीं हुए थे।
सिविल सर्जन डॉ एम एस सागर के मार्गदर्शन में बच्चे का फैसिलिटी बेस्ड नियो नेटल केयर गाइडलाइंस अनुसार उपचार शुरू किया गया। बच्चे को भर्ती उपरांत सीपीएपी मशीन द्वारा ऑक्सीजन प्रदाय किया गया एवं बाद में नेजल प्रॉन्स से ऑक्सीजन प्रदाय की गई। प्रोटोकॉल अनुसार चिकित्सीय  प्रबंधन जारी रखा। बच्चे को बार बार एप्नीया (सांस रोक लेना) की स्थिति बनती रही जो कि प्रोटोकाल अनुसार मैनेज की गई। बच्चे की खून की जांचे कराई गई एवं बच्चे को आवश्यक उपचार शुरू किया गया। भर्ती के कुछ दिनों बाद नवजात शिशु को एनीमिया ऑफ प्रीमैच्योरिटी का सामना करना पड़ा जिसके चलते उसका ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया गया। स्थिति में थोड़ा सुधार होने लगा तभी आवश्यक उपचार के साथ साथ निगरानी में नली द्वारा कम मात्रा में मां का दूध शुरू किया गया एवं दिन प्रतिदिन दूध पिलाने की मात्रा बढ़ाई गई । माता को बच्चे की देखभाल में सहायक बनाया गया एवं प्रतिदिन कंगारू मात्र देखभाल कराई गई। उपचार में काफी सहायता मिली और बच्चे का वजन भी बढ़ना शुरू हुआ । करीब 61 दिन तक बच्चा एस एन सी यू में भर्ती रहा । हुक्की द्वारा अपने बच्चे को प्रतिदिन अधिक से अधिक केएमसी कराई जाती थी । नवजात की आंखों की जांच भी कराई गई।
नवजात का एसएनसीयू में इन्फेक्शन प्रिवेंशन का भी कड़ाई से पालन किया गया। नवजात का पूरी तरह स्वस्थ होने, वजन में वृद्धि एवं माता द्वारा दूध एवं अन्य देखभाल में सक्षम होने उपरान्त 7 अप्रैल को ’61’ दिन बाद डिस्चार्ज किया गया। डिस्चार्ज के समय बच्चे का वजन ’1300 ग्राम था।
बच्चे के परिजनों ने जन कल्याणकारी सरकार एवं शासकीय अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले सिविल सर्जन डॉ एम एस सागर सहित स्वास्थ्य कर्मियों का आभार व्यक्त किया।

जिला संवाददाता लाखनसिंह सिसोदिया की स्पेशल रिपोर्ट