माता के नौ रूपों को समर्पित नवरात्र का पर्व हिंदू धर्मावलंबियों की आस्था का पर्व है
माता के नौ रूपों को समर्पित नवरात्र का पर्व हिंदू धर्मावलंबियों की आस्था का पर्व है
माता के नौ रूपों को समर्पित नवरात्र का पर्व हिंदू धर्मावलंबियों की आस्था का पर्व है जिसमें शक्ति की आराधना के माध्यम से मां भगवती से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, साहस और धैर्य की कामना की जाती हैं। वर्ष भर में 4 नवरात्रि मनाई जाती हैं जिनमें से 2 गुप्त व 2 दृश्य होती हैं। जिनमे से चैत्र और शारदीय नवरात्रि दृश्य नवरात्रि मानी गई हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि दिनांक 22 सितंबर, सोमवार से प्रारंभ हो रही हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि में माता का आगमन गज ( हाथी ) पर होने से व्यापारी वर्ग के लिए विशेष फलदायी हैं। एवं आर्थिक संपन्नता प्रदान करने वाली हैं।
इस वर्ष नवरात्रि में तिथि वृद्धि होने से नवरात्रि दस दिनों की है। नवरात्रि में तिथी वृद्धि सुख, शांति और सौभाग्य देने वाली है।
ज्योतिष एवं वास्तु आचार्य पं. अनुराग जोशी ने बताया की धर्मसिंधु के अनुसार सूर्योदय से आरंभ की 10 घटी घट स्थापना हेतू शुभ मानी गई हैं–
" सूर्योदयोत्तरं दश घटी मध्ये तत्रासम्भवे मध्यान्हे अभिजिन्मुहूर्ते प्रारंभ:कार्यो न त्वपराहणे एवं च प्रतिपद आधषोडश नाड़ीनिषेध:"
अतः इस वर्ष माताजी की स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 07 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 19 मिनट तक मिल रहा है।
साथ ही अभिजीत मुहूर्त में प्रातः 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 43 मिनट तक भी घट स्थापना हेतु शुभ मुहूर्त है।

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