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👮‍♂️​अनूपपुर पुलिस की मानवीय पहल: सोशल मीडिया बना सहारा, राह भटकी बेटी को मिला परिवार का किनारा

       👮‍♂️​ सोशल मीडिया बना सहारा, राह भटकी बेटी को मिला परिवार का किनारा

👉अपनों से मिलाने वाली 'खाकी' को सलाम!              🤝✨
​जब तकनीक और कर्तव्य का मेल होता है, तो अंधेरे में भी उम्मीद की किरण दिखती है। अनूपपुर पुलिस ने गुमशुदा और मानसिक रूप से अस्वस्थ 20 वर्षीय युवती को सुरक्षित उनके परिजनों से मिलवाकर मानवता का धर्म निभाया है।
​26 जनवरी से अपनी लाड़ली की तलाश में भटक रहे माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान लौटाना ही पुलिस का असली सम्मान है। पुलिस अधीक्षक  मोती उर रहमान के नेतृत्व में मिली इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि "देशभक्ति-जनसेवा" केवल एक नारा नहीं, बल्कि अनूपपुर पुलिस का संकल्प है।  

 
​कहते हैं कि अगर खाकी के पीछे एक संवेदनशील दिल हो, तो बिछड़े हुए भी मिल जाते हैं। अनूपपुर पुलिस ने गणतंत्र दिवस से लापता एक 20 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती को उसके परिजनों से मिलवाकर न केवल अपना कर्तव्य निभाया, बल्कि मानवता की एक बेमिसाल इबारत भी लिखी है।
👉​क्या है पूरा मामला?

बीते दिनों अमरकंटक रोड पर एक युवती बदहवास और व्याकुल स्थिति में मिली थी। युवती मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण अपना पता बताने में असमर्थ थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने तत्काल मोर्चा संभाला।

युवती की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पुलिस ने उसकी पहचान के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया। पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसने सेतु का काम किया। अंततः युवती की पहचान श्री शिवकुमार पाव की पुत्री के रूप में हुई, जो 26 जनवरी से लापता थी।

जब माता-पिता कोतवाली थाना पहुँचे और अपनी खोई हुई बेटी को सुरक्षित देखा, तो उनकी आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पिता शिवकुमार ने गदगद भाव से कहा, "पुलिस हमारे लिए देवदूत बनकर आई।" परिजनों ने अनूपपुर पुलिस की इस संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के लिए सहृदय आभार व्यक्त किया है।
​स्थानीय जनता द्वारा कोतवाली पुलिस के इस सेवाभावी चेहरे की जमकर सराहना की जा रही है।