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पद्म पुरस्कार 2023 की सूचि में कला के क्षेत्र मे पद्म श्री पुरस्कार के लिये जिले से परमार दंपत्ति श्री रमेश परमार एवं श्रीमती शान्ति परमार शामिल है

पद्म पुरस्कार 2023 की सूचि में कला के क्षेत्र मे पद्म श्री पुरस्कार के लिये जिले से परमार दंपत्ति श्री रमेश परमार एवं श्रीमती शान्ति परमार शामिल है

यह जिला, राज्य एवं देश के लिये गौरव की बात हैक लेक्टर श्रीमती रजनी सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री अगम जैन द्वारा 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर परमार दंपत्ति श्री रमेश परमार एवं श्रीमती शान्ति परमार को पुष्पहार, शाल एवं श्रीफल देकर सम्मानित किया

झाबुआ 3 फरवरी, 2023। पद्म श्री पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक पुरूस्कारों में से एक है, जो विभिन्न विषयों/गतिविधियों के क्षेत्रों में दिया जाता है, जैसे- कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार औ उद्योग, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल, नागरिक सेवा आदि। ये पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक समारोह में प्रदान किया जाता है।

वर्ष 2023 के लिये महामहिम राष्ट्रपति ने 106 पद्म पुरस्कार प्रदान की मंजूरी दी है। जिसमें 6 पद्म विभूषण 9 पद्म भूषण और 91 पद्म श्री पुरस्कार शामिल है।
पद्म पुरस्कार 2023 की सूचि में कला के क्षेत्र मे पद्म श्री पुरस्कार के लिये जिले से परमार दंपत्ति श्री रमेश परमार एवं श्रीमती शान्ति परमार शामिल है। यह जिला, राज्य एवं देश के लिये गौरव की बात है।
कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह एवं पुलिस अधीक्षक श्री अगम जैन द्वारा 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर परमार दंपत्ति श्री रमेश परमार एवं श्रीमती शान्ति परमार को पुष्पहार, शाल एवं श्रीफल देकर सम्मानित किया।
आदिवासी गुडिया कला को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाले परमार दम्पत्ति को गणंतत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की गई।

  • हस्तशिल्प कलाकार श्रीमती शान्ति परमार उद्यमीता विकास केन्द्र झाबुआ के द्वारा 1993 में हस्तशिल्प कला का प्रशिक्षण के अन्तर्गत 6 माह जिसमें आदिवासी गुडीया बनाना सिखा था। तब से परमार दंपत्ति आदिवासी गुडिया बनाने का कार्य कर रहे है। दोनो पति- पत्नी इस हस्तशिल्प कला से 1993 से जुड़े है।
    15 अगस्त 1997 को श्रीमती शान्ति परमार को झाबुआ के तात्कालिन कलेक्टर श्री मनोज श्रीवास्तव द्वारा आदिवासी गुडिया बनाने के लिये सर्वश्रेष्ठ शिल्पी के लिये प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इसके बाद ये लगातार मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलोें में आयोजित होने वाले शिल्पी मेंलो में जाने लगे। जिला, राज्य, राष्ट्रीय एवं अन्तराष्ट्रीय मेलो में लगातार जा रहे है। जहां पर हम हमारे द्वारा बनी हस्तशिल्प कला जिसमें आदिवासी गुडिया, तीर-कमान, बैलगाड़ी, पिथोरा आर्ट, आदिवासी पेंटिग को शामिल करते है।

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