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एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय से आदिवासी बच्चों का होगा चहुंमुखी विकास

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय से आदिवासी बच्चों का होगा चहुंमुखी विकास

किसी देश का विकास तभी संभव है, जब देश का हर व्यक्ति अपना योगदान देश के निर्माण में दे रहा हो। इससे भी बड़ी बात है कि देश के सभी नागरिकों को देश के विकास में योगदान देने के लिए बराबर के अवसर उपलब्ध हों। भारत जैसा विशाल देश, जहां अनंत विषमताएं हैं। राष्ट्र निर्माण के लिए सबको साथ लेकर चलना किसी चुनौती से कम नहीं है। केंद्र सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की संकल्पना, इन्हीं विषमताओं को मिटाने का एक प्रयास है। इसी क्रम में सरकार, समाज के सबसे पिछड़े तबके अनुसूचित जनजाति के भविष्य को मुख्यधारा में लाने के लिए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रयासरत है। एकलव्य आवासीय आदर्श विद्यालय इसी दिशा में एक कदम है।

विद्यालय का प्रथम शिलान्यास हुआ
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने 3 और 4 जुलाई, 2021 को झारखंड के तीन जिलों में 5 एकलव्य आवासीय आदर्श विद्यालयों (ईएमआरएस) के निर्माण की आधारशिला रखी। केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा शनिवार (03 जुलाई) को सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड में गीता कोड़ा, चाईबासा संसदीय क्षेत्र से सांसद; झारखंड सरकार के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री चंपाई सोरेन और झारखंड में राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का प्रथम शिलान्यास किया गया।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय क्या है
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) को वर्ष 1997-98 में शुरू किया गया था। भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान से एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित किए जाते हैं। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, अनुच्छेद 275 (1) के तहत निर्माण के लिए मिली राशि को अपने अनुसार इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं। राज्य, मंत्रालय द्वारा स्वीकृत संख्या से अतिरिक्त ईएमआरएस का भी संचालन कर सकते हैं। अगर राज्य के सभी विद्यालय सुचारू रूप से काम कर रहे हैं तो राज्य केंद्र से और विद्यालयों की मांग कर सकता है।

क्या है एकलव्य आदर्श विद्यालय का उद्देश्य
ईएमआरएस का उद्देश्य अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मध्यम और उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करना है। इस कारण दूरदराज के क्षेत्रों में जनजाति (एसटी) के छात्र, न केवल उच्च और व्यावसायिक शैक्षिक पाठ्यक्रम और सरकारी व सार्वजनिक नौकरियों के लिए आरक्षण का लाभ उठाने में सक्षम हों, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में गैर एसटी आबादी के बराबर सर्वोत्तम अवसरों तक पहुंच प्राप्त कर सकें। ईएमआरएस में नामांकित सभी छात्रों का व्यापक शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से विकास इसका अंतिम ध्येय है।

क्या है सरकार का उद्देश्य
2018-19 के केंद्रीय बजट में ईएमआरएस के महत्व को समझते हुए, सरकार ने घोषणा की थी कि आदिवासी बच्चों को उनके अपने वातावरण में गुणवत्तापूर्ण सर्वोत्तम शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस जमीन पर उतारने के लिए निर्णय लिया गया है कि वर्ष 2022 तक प्रत्येक ब्लॉक में, जहां 50 प्रतिशत से अधिक एसटी आबादी और कम से कम 20,000 आदिवासी जनसंख्या के अनुपात में एक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय होगा।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय किस तरह होंगे अन्य विद्यालयों से अलग
एकलव्य विद्यालय में शिक्षा प्रदान करने के अलावा स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए विशेष सुविधाएं होंगी। इन विद्यालयों में खेल और कौशल विकास में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये विद्यालय बहुत हद तक जवाहर नवोदय विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और केन्द्रीय विद्यालयों के समकक्ष होंगे।

इस जगह खुलेंगे 4 अन्य एकलव्य आदर्श विद्यालय
आदिवासी युवाओं के बेहतर भविष्य निर्माण की दिशा में कार्य को जारी रखते हुए, केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने 4 जुलाई को पूर्वी सिंहभूम के गुरबंदा और धालभूमगढ़ ब्लॉक में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति राज्य मंत्रीचंपाई सोरेन और स्थानीय सांसद और विधायक की उपस्थिति में 2 ईएमआरएस के निर्माण की आधारशिला रखी। वहीं केन्द्रीय मंत्री ने शनिवार को पश्चिमी सिंहभूम के हाटगम्हरिया और मझगांव प्रखंडों में एकलव्य विद्यालयों का भी शिलान्यास किया।

कितना होता है एक विद्यालय का बजट
छात्रावास और स्टाफ क्वार्टर सहित स्कूल परिसर के लिए 12 करोड़ रुपए तक का प्रावधान होता है, जो पहाड़ी इलाकों, रेगिस्तान और द्वीप में 16 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। किसी भी अन्य वृद्धि को राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र को पूरा करना होता है। प्रथम वर्ष के दौरान प्रति छात्र 42000/- के खर्चे का प्रावधान है, जिसमें हर दूसरे वर्ष मुद्रास्फीति आदि की भरपाई के लिए 10% की वृद्धि की जा सकती है।

एकलव्य विद्यालयों के उपलब्धियां
EMRS सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में उत्कृष्टता के द्वीप बन गए हैं, जहां ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में आदिवासी बच्चे आ रहे हैं। योजना का ध्येय अकादमिक और पाठ्येतर दोनों क्षेत्रों में छात्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। विशेष कोचिंग, शैक्षिक पर्यटन, प्रदर्शन यात्राओं,
विशेष शिविरों, खेल शिविरों के माध्यम से छात्रों को ऊंचे सपने देखने और उन्हें पाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इन विद्यालयों में छात्रों ने अकादमिक क्षेत्र में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है, 2017-18 की परीक्षाएं के दौरान लगभग 90% उत्तीर्ण छात्रों में से 53% ने 10वीं में प्रथम श्रेणी हासिल की है और इसी तरह 81% उत्तीर्ण छात्रों में से 71% ने 12वीं में प्रथम श्रेणी हासिल की है। इसके अलावा छात्रों ने खेल और अन्य सह पाठ्यक्रम गतिविधियां में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। ईएमआरएस के कई छात्रों ने सफलतापूर्वक एनईईटी, आईआईटी-जेईई, नेशनल लॉ स्कूल इत्यादि जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को पास किया है। 2017-18 में 146 छात्रों ने नीट पास किया, 253 छात्रों ने जेईई मेन, 8 ने CLAT क्लियर किया है। इन स्कूलों ने कई टॉपर्स भी तैयार किए हैं।

सभी विद्यालयों में होगी तीरंदाजी की सुविधा
केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने और अधिक जानकारी देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है, जिसमें प्रत्येक स्कूल में 480 छात्र अध्ययन करेंगे। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। छात्रों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि भारत जैसे-जैसे आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, यह योजना आदिवासी क्षेत्रों के लिए एक नई क्रांति का सूत्रधार है। झारखंड के सभी एकलव्य आदर्श विद्यालयों में तीरंदाजी खेल की सुविधा उपलब्ध होगी। वर्ष 2021-22 स्वतंत्रता का 75वां वर्ष होगा और इस वर्ष स्वीकृत एकलव्य विद्यालय शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी वर्षगांठ मनाई जाएगी, तो एकलव्य विद्यालयों के पूर्व छात्र हर जगह महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होंगे और तब तक वे अपनी योग्यता साबित कर कर चुके होंगे।

 

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